कोलकाता

मानदेय बढ़ाने सहित कई मांगे ले कर सड़कों पर उतरी आशा कर्मी

कोलकाता. सैकड़ों आशा कर्मी 15,000 मासिक मानदेय और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर स्वास्थ भवन की ओर मार्च के लिए सड़कों पर उतरी। प्रदर्शनकारियों ने सियालदह और हावड़ा स्टेशन जैसे प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट्स पर जमावड़ा किया। मौलाली क्रॉसिंग और सियालदह ब्रिज पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दक्षिण की ओर जाने वाले […]

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Jan 22, 2026
विरोध प्रदर्शन करती आशा कर्मी

कोलकाता. सैकड़ों आशा कर्मी 15,000 मासिक मानदेय और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर स्वास्थ भवन की ओर मार्च के लिए सड़कों पर उतरी। प्रदर्शनकारियों ने सियालदह और हावड़ा स्टेशन जैसे प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट्स पर जमावड़ा किया। मौलाली क्रॉसिंग और सियालदह ब्रिज पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दक्षिण की ओर जाने वाले वाहनों को कई घंटों तक डायवर्ट करना पड़ा। एसएन बनर्जी रोड और डोरीना क्रॉसिंग पर जाम लगने के साथ साथ साल्ट लेक और ईएम बाइपास पर यातायात पर असर पड़ा, जहां चिंगरीहाटा फ्लाईओवर के पास स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय के निकट सुरक्षा बढ़ने और आशा कर्मियों के जमावड़े से यातायात बाधित रहा। पुलिस बैरिकेडिंग के कारण साल्ट लेक जाने से रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर स्वास्थ भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और पुलिस कार्रवाई में कई लोगों को हिरासत में लिया गया। कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहन में ले जाया गया, जबकि अन्य नारेबाजी करती रही।

आशा कर्मियों कहा कि वे केवल अपने वैध अधिकारों की मांग करने आई

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इसके बाद वे स्वास्थ भवन के सामने सड़क पर बैठ गईं जिससे भारी पुलिस मौजूदगी के बीच यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। आशा कर्मियों ने कहा कि वे केवल अपने वैध अधिकारों की मांग करने आई हैं इसलिए पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और मासिक मानदेय बढ़ाने सहित कई मुद्दों पर लंबे समय से अनसुनी हो रही है। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्य की स्वास्थ्य राज्यमंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आशा कर्मियों के इस आंदोलन के पीछे राजनीतिक प्रभाव होने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आशा कर्मियों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आशा कर्मियों के प्रति संवेदनशील हैं और उन्हें किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनने से सतर्क रहने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत आने वाली आशा कर्मियों के मानदेय पर केंद्र सरकार के स्तर पर पर्याप्त समीक्षा क्यों नहीं की जाती। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

बाधाएं खड़ी करने का दावा

उत्तर और दक्षिण बंगाल के अलग-अलग जिलों से राजधानी की ओर रवाना हो रहीं आशा कर्मियों ने परिवहन और पुलिस स्तर पर बाधाएं खड़ी किए जाने का दावा किया। इसके विरोध में उन्होंने कई जगहों पर सड़क अवरोध कर अपना विरोध दर्ज कराया। आशा कर्मी संगठनों के मुताबिक, वे स्वास्थ्य भवन जाकर राज्य के स्वास्थ्य सचिव को ज्ञापन सौंपने की योजना में थीं। इसी उद्देश्य से सुबह से ही विभिन्न जिलों से कोलकाता आने की तैयारियां की गई थीं। हालांकि, कुछ इलाकों में आशा कर्मियों का आरोप है कि बस मालिकों पर दबाव डालकर उन्हें परिवहन सुविधा देने से रोका गया। जबकि कई स्थानों पर पुलिस हस्तक्षेप के भी आरोप लगाए गए हैं।

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Published on:
22 Jan 2026 09:45 am
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