
West Bengal Election Commission: पश्चिम बंगाल में सात शहरी निकायों के आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और वाम मोर्चे ने राज्य चुनाव आयोग (WBSEC) से मांग की है कि नगर निकाय चुनाव विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से पहले वाली मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
यह मांग मंगलवार, 27 अक्टूबर को राज्य चुनाव आयोग की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उठाई गई। बैठक में इस साल के अंत में प्रस्तावित सात नगर निकायों के चुनावों को लेकर चर्चा हुई।
बैठक में TMC, CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने मतदाता सूची में नामों के कथित तौर पर हटाए जाने का मुद्दा उठाया। राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, इन दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इनमें से कुछ मामलों का भविष्य अपीलीय न्यायाधिकरणों के फैसलों पर निर्भर है।
विपक्षी दलों का तर्क है कि जब कई मतदाताओं के नाम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो SIR के बाद तैयार होने वाली मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराना उन लोगों के साथ अन्याय हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चुनाव से पहले इस्तेमाल की जा रही पुरानी मतदाता सूची के आधार पर मतदान कराने की मांग की। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर विपक्षी दलों ने जो दावे किए हैं, वे उनके आरोप हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक सूची और संबंधित प्रक्रिया के आधार पर ही प्रत्येक मतदाता की स्थिति स्पष्ट होगी।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची का ड्राफ्ट 12 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा, जबकि संशोधित अंतिम सूची 4 जनवरी को जारी होनी है। चुनाव आयोग पहले कह चुका है कि जुलाई तक सूची में शामिल मतदाता मतदान कर सकेंगे। हालांकि, SIR प्रक्रिया के जारी रहने के कारण आगामी चुनावों में इस्तेमाल होने वाली मतदाता सूची की तारीख और स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सात नगर निकायों के चुनाव नवंबर में कराए जाते हैं, तो अक्टूबर की मतदाता सूची को अंतिम सूची के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। इससे चुनाव की तारीख और मतदाता सूची को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में सात नगर निकायों के चुनाव नवंबर के अंतिम सप्ताह में कराने की योजना थी। इसके बाद दिसंबर की शुरुआत तक नए नगर निकाय बोर्डों का गठन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन मतदाता सूची तैयार करने और वार्डों के परिसीमन से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण इस समयसीमा पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में नवंबर में चुनाव कराना मुश्किल होता दिखाई दे रहा है, हालांकि चुनाव की आधिकारिक तारीख की घोषणा होना बाकी है।
इस साल के अंत तक जिन नगर निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं, उनमें कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम भी शामिल हैं। अन्य शहरी स्थानीय निकायों में मतदान अगले साल फरवरी में होने की संभावना जताई गई है। फिलहाल, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के सामने SIR से पहले की मतदाता सूची इस्तेमाल करने की मांग रखी है। अब यह देखना होगा कि राज्य चुनाव आयोग मतदाता सूची की स्थिति, परिसीमन और चुनाव कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर क्या निर्णय लेता है।