दो चरण में मतदान की मांग कोलकाता. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने सोमवार को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठकों की शुरुआत की। दिन की शुरुआत प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ लगातार बैठकों से हुई, जिनमें उनके साथ निर्वाचन […]
दो चरण में मतदान की मांग
कोलकाता. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने सोमवार को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठकों की शुरुआत की। दिन की शुरुआत प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ लगातार बैठकों से हुई, जिनमें उनके साथ निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद रहे।
दो चरण में मतदान की मांग
भाजपा और माकपा के प्रतिनिधियों ने चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक अधिकारियों के आचरण से जुड़े मुद्दे उठाए। वैचारिक मतभेदों के बावजूद दोनों दलों ने आयोग से मतदान को कम समय में, आदर्श रूप से एक या दो चरणों में कराने का अनुरोध किया। माकपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद सलीम ने किया और उन्होंने मतदाता सूची में विसंगतियों तथा युवाओं को फॉर्म-6 भरने में आने वाली डिजिटल बाधाओं पर चिंता जताई। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की विवादित टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग की और संवेदनशील मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों की निगरानी की आवश्यकता बताई। प्रतिनिधिमंडल में शिशिर बजोरिया, जगन्नाथ चटर्जी और तापस राय शामिल थे। कांग्रेस की ओर से अशुतोष चट्टोपाध्याय और प्रदीप भट्टाचार्य सहित अन्य नेता बैठक में उपस्थित रहे।
फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर सवाल
बैठक में पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल शिकायत के आधार पर नाम हटाना, बिना मतदाता को पक्ष रखने का अवसर दिए, लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर चिंता पैदा करता है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल फिरहाद हकीम ने भी इस प्रक्रिया की आलोचना की।
हिंसा और लापरवाही पर सख्त सन्देश
मुख्य चुनाव आयुक्त ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक में कहा कि आयोग हर गतिविधि पर निगरानी रख रहा है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि प्रत्येक कार्रवाई का डिजिटल फुटप्रिंट रहता है और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिया कि मतदाताओं के लिए भय-मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए और बहानों की बजाय कार्यान्वयन पर ध्यान दिया जाए।