
Cyber Fraud: कोलकाता पुलिस ने ऑनलाइन ठगी और फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने साल्ट लेक इलाके में बने एक मकान पर छापेमारी कर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के रहने वाले सात शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी लोगों के फर्जी कागज बनाकर उनके नाम पर सिम कार्ड निकालते थे और फिर लोन देने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपए की ठगी और वसूली करते थे। इस पूरे मामले में पुलिस अब तक कुल 11 लोगों को पकड़ चुकी है, जिनमें चार आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह का पर्दाफाश कोलकाता के नरकेलडांगा थाने में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान हुआ। आरोपियों ने साल्ट लेक के एक रिहायशी मकान को अपना ठिकाना बनाया हुआ था और वहीं से एक फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी संख्या में स्मार्टफोन और कीपैड फोन बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी हर बार नए फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
मामले की शुरुआत नरकेलडांगा थाने के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद अब्बासुद्दीन बिस्वास की एक जांच रिपोर्ट के बाद हुई थी। शुरुआती जांच में पता चला कि यह गिरोह 'तौसीफ टेलीकॉम' और उससे मिलती-जुलती फर्जी संस्थाओं के नाम पर काम कर रहा था। पुलिस ने सबसे पहले 17 सितंबर को नरकेलडांगा निवासी तौसीफ आलम को गिरफ्तार किया था। तौसीफ से जब पूछताछ की गई तो इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खुलती चली गईं। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन और लोगों को पकड़ा और फिर शनिवार को साल्ट लेक में दबिश देकर सात अन्य आरोपियों को दबोच लिया।
जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य सरगना सुंदर नाम का व्यक्ति है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से इन युवकों को पश्चिम बंगाल लेकर आया था। यहां साल्ट लेक में ठिकाना बनाने के बाद ये लोग लोन कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करते थे। ये आरोपी आम लोगों के दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी सिम कार्ड जारी करवाते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बचे रहें। इसके बाद लोन स्वीकृत कराने के नाम पर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाकर लोगों से लाखों रुपए ऐंठ लेते थे। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और गिरोह के अन्य नेटवर्क की तलाश जारी है।