
खड़गपुर। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के नारायणगढ़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से कई क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। गांवों और सड़कों पर पानी भरने से आम जनजीवन प्रभावित है। नारायणगढ़ के मान्दार गांव का बड़ा हिस्सा भी बाढ़ और जलभराव की चपेट में है। इन मुश्किल हालात के बीच माधवचक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक सुब्रत दास की कर्तव्यनिष्ठा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
सुब्रत दास का घर मान्दार गांव में है। लगातार बारिश के कारण उनके घर से विद्यालय तक जाने वाला रास्ता पानी में डूब गया है। स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें करीब कमर तक गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद उन्होंने विद्यालय जाना बंद नहीं किया। कपड़े और बैग को भीगने से बचाने के लिए उन्होंने गमछा पहनकर पानी में उतरने का फैसला किया। कपड़े और बैग हाथ में लेकर वह कमर तक पानी में चलकर विद्यालय पहुंचे। कीचड़ और गहरे पानी के बीच यह सफर जोखिम भरा होने के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी।
सुब्रत दास ने कहा कि लगातार बारिश से गांव और नारायणगढ़ के कई इलाके पानी में डूबे हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई अनिश्चित समय तक नहीं रोकी जा सकती। उन्होंने कहा, "बच्चों का भविष्य अंधेरे में क्यों रहेगा? इसलिए कितनी भी परेशानी हो, बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय जाना ही होगा।" उनका कहना है कि स्कूल पहुंचना उनके लिए सिर्फ नौकरी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा दायित्व है।
वहीं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से पैदा हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए पश्चिम मेदिनीपुर के सबांग और हुगली के आरामबाग के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। भारी बारिश और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) से पानी छोड़े जाने के बाद आरामबाग सब-डिविजन पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। लगातार बारिश के कारण द्वारकेश्वर नदी उफान पर है, जबकि डीवीसी से पानी छोड़े जाने के बाद खानाकुल से होकर बहने वाली मुंडेश्वरी और रूपनारायण नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। आरामबाग की सलेपुर पंचायत के कुछ हिस्सों में पानी पहले ही घुस चुका है। पश्चिमपारा गांव को जोड़ने वाली तीन सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे 100 से अधिक परिवार अपने घरों में ही फंसकर रह गए हैं।