
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन को भरोसा दिलाया कि जब भी वे राज्य का दौरा करेंगी, उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नई भाजपा सरकार के तहत हर कोई अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र है। कोलकाता के रवींद्र सदन में लेखिका के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि जब भी वे पश्चिम बंगाल आएं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार का कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धमकी और डराने-धमकाने के दिन अब बीत चुके हैं। उनका यह बयान साफ तौर पर उन हालात की ओर इशारा था, जिनमें तसलीमा नसरीन को 2007 में अपने लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था। बांग्लादेशी लेखिका ने कोलकाता में साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लिया। तसलीमा लगभग 19 साल बाद शुक्रवार को कोलकाता लौटीं और कट्टरपंथ-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में शहर में शनिवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दीं।
उन्होंने इस कार्यक्रम में कविता पाठ किया। जहां भाजपा ने तसलीमा की वापसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पुष्टि के रूप में पेश किया तो आयोजकों का कहना था कि यह कार्यक्रम केवल साहित्य और धार्मिक कट्टरवाद के विरोध का उत्सव है। हालांकि भाजपा शासन में तसलीमा की कोलकाता वापसी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक संवेदनशीलताओं के प्रति राज्य के रुख पर बहस को फिर से हवा दे दी है।
सुवेंदु ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी है कि जब भी आप आएं, तो आपको सुरक्षा दी जाए। उन्होंने निर्वासित लेखिका को उनकी इच्छा अनुसार जितनी बार चाहें राज्य का दौरा करने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा, जब भी आप चाहें, जितनी बार चाहें, यहां आ सकती हैं।
राज्य में बदले हुए राजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नई सरकार अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, नई सरकार के तहत पश्चिम बंगाल में हर किसी को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने का अधिकार है। बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका 2004 से 2007 के बीच कोलकाता में रही थीं। उस समय की वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें शहर छोड़ने के लिए कहा था, क्योंकि उनकी आत्मकथा द्विखंडितो के कुछ हिस्सों को लेकर हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।