कोरबा

Police bus accident: पुलिस बस से दो युवकों की मौत का मुआवजा अटका, DGP कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

Police bus accident:: पुलिस बस हादसे में दो युवकों की मौत के मुआवजे का भुगतान नहीं होने पर अदालत ने छत्तीसगढ़ DGP और कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए हैं।
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Updated: 6 Sep 2026, 11:48 AM IST
Road Accidents
Karauli: सांकेतिक तस्वीर (फोटो-एआई)

Bus accident: हादसे में जान गंवाने वाले दो युवकों के परिवारों को अदालत से तय मुआवजा राशि नहीं मिलने पर अब पुलिस विभाग को अदालत की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है। करीब ढाई साल पहले VIP ड्यूटी में तैनात पुलिस विभाग की मिनीबस की टक्कर से दो युवकों की मौत के मामले में अदालत ने मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है।

कुर्की की प्रक्रिया शुरू

अदालत के इस आदेश के बाद विभागीय स्तर पर कुर्की की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मामले में कोर्ट पहले ही मृतकों के परिजनों को लाखों रुपए का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ निर्धारित अवधि में देने का आदेश दे चुका था। तय समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर पीड़ित परिवारों ने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कोर्ट ने यह कड़ा कदम उठाया।

27 सितंबर 2023 को हुआ था दर्दनाक हादसा

यह हादसा 27 सितंबर 2023 की शाम करीब 6:30 बजे रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के पतरापाली के पास हुआ था। उस समय पुलिस विभाग की मिनीबस VIP ड्यूटी में तैनात थी। इसी दौरान मिनीबस ने एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। मोटरसाइकिल पर जांजगीर-चांपा जिले के हेडसपुर गांव निवासी बैजनाथ कंवर और उनके साथी रवि यादव सवार थे। टक्कर इतनी तेज थी कि बैजनाथ कंवर की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल रवि यादव को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।हादसे के बाद दोनों परिवारों के सामने आर्थिक और पारिवारिक संकट खड़ा हो गया। मृतकों के आश्रितों ने न्याय और मुआवजे के लिए अदालत का रुख किया।

कोर्ट ने चालक को माना था लापरवाही का दोषी

मुआवजे की मांग को लेकर पीड़ित परिवारों ने कोरबा स्थित प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में आवेदन प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के दौरान दुर्घटना से जुड़े दस्तावेज, साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे गए। सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि दुर्घटना में शामिल पुलिस वाहन छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) के नाम पर पंजीकृत था और हादसे के समय उसे कोरबा के चालक द्वारा चलाया जा रहा था। साक्ष्यों के आधार पर पीठासीन न्यायाधीश गरिमा शर्मा की अदालत ने चालक को लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना।

14 जनवरी 2026 को मुआवजे का आदेश

मामले में अदालत ने 14 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश दिया था। आदेश के मुताबिक बैजनाथ कंवर के परिजनों को 26 लाख 9 हजार 200 रुपए और रवि यादव के परिवार को 17 लाख 5 हजार रुपए का भुगतान किया जाना था।अदालत ने यह राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ निर्धारित की थी। इसके लिए एक महीने की समयसीमा तय की गई थी। इस आदेश के बाद पीड़ित परिवारों को उम्मीद थी कि लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत होगा और उन्हें मुआवजा मिल सकेगा। लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी राशि का भुगतान नहीं किया गया।

मुआवजा नहीं मिला तो फिर कोर्ट पहुंचे परिजन

एक महीने की निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर मृतकों के परिजनों ने दोबारा अदालत की शरण ली। पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता महेंद्र अग्रवाल ने अदालत के समक्ष भुगतान नहीं होने की स्थिति रखी। परिजनों की ओर से अदालत को बताया गया कि फैसला आने के बावजूद उन्हें निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिल सकी है। ऐसे में परिवारों को आर्थिक राहत मिलने में देरी हो रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने आदेश की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाया।

DGP और SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश

मुआवजा राशि के भुगतान में देरी पर अदालत ने अब DGP छत्तीसगढ़ और SP कोरबा कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद संबंधित विभागों में हलचल बढ़ गई है और कुर्की की विभागीय प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। अदालत के इस कदम को पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पुलिस विभाग के लिए यह आदेश एक कड़ा संदेश है कि अदालत द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान समय पर नहीं करने पर सरकारी विभागों की संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

कानून की नजर में सभी बराबर

इस मामले में अदालत की कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कानून के सामने सरकारी विभाग और आम नागरिक के लिए अलग-अलग मापदंड नहीं हो सकते। अदालत के आदेश के बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर सरकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश इसी सख्ती को दर्शाता है। अब देखना होगा कि कुर्की की कार्रवाई से पहले मुआवजा राशि का भुगतान किया जाता है या अदालत के आदेश के अनुसार संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। दूसरी ओर, मृतकों के परिवारों को उम्मीद है कि अदालत की सख्ती के बाद उन्हें लंबे समय से लंबित मुआवजा जल्द मिल सकेगा।

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6 Sep 2026, 11:48 AM IST
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