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छत्तीसगढ़ के इस जिले में 250 से अधिक शिक्षक पद रिक्त, भर्ती में क्यों हो रही देरी? जानें वजह!

Teacher Vacancy: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 250 से अधिक शिक्षक पद रिक्त हैं, जबकि स्वामी आत्मानंद स्कूलों में भी 79 पदों पर भर्ती अटकी हुई है।
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Teacher Shortage

शिक्षक संकट (फोटो सोर्स- Magnific)

Chhattisgarh Teacher Recruitment: कोरबा जिले के सरकारी स्कूलों में आधे से अधिक शैक्षणिक सत्र बीत चुका है, लेकिन शिक्षकों की कमी अब भी बनी हुई है। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों से लेकर स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों (सेजेस) तक शिक्षक भर्ती का इंतजार किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में 250 से अधिक पद रिक्त हैं। शासन स्तर पर फिलहाल 130 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिनमें प्राथमिक स्कूलों के 100 और मिडिल स्कूलों के 30 पद शामिल हैं। वहीं, सेजेस में भी 79 शिक्षकों की भर्ती अटकी हुई है।

प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है। परीक्षा परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और पदस्थापना जैसी प्रक्रियाएं दिसंबर तक पूरी होने की संभावना है। सेजेस में अक्टूबर के अंत तक भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के संकेत मिले हैं। जिले में 1,479 प्राथमिक और 524 मिडिल स्कूल हैं। इनमें से लगभग 138 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। शैक्षणिक सत्र का आधे से अधिक समय बीतने के बाद भी शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

आत्मानंद स्कूलों में 79 पद रिक्त

कोरबा जिले में संचालित 15 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों के 79 पद रिक्त हैं। ये सभी पद संविदा के आधार पर भरे जाने हैं। गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी हुई है। शिक्षकों की अनुपस्थिति में विद्यार्थी किसी तरह पढ़ाई कर रहे हैं और उन्हें सेल्फ स्टडी तथा ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

पहले इन स्कूलों में जिला स्तरीय समिति साक्षात्कार के आधार पर भर्ती करती थी, लेकिन गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद जिला स्तर पर यह प्रक्रिया बंद कर दी गई। अब संचालनालय की ओर से राज्य स्तर पर सेजेस के लिए कुल 1,812 पदों पर भर्ती की जा रही है। यह प्रक्रिया अभी जारी है और पूरी नहीं हुई है।

तीन शैक्षणिक सत्र से बरकरार है शिक्षक संकट

जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों से बनी हुई है। इसके कारण विद्यार्थियों को लगातार पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर छात्र कलेक्टोरेट तक पहुंच चुके हैं। पसान में चक्काजाम भी किया गया, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

जिला शिक्षा विभाग ने मई में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन शासन स्तर से इस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। अब भर्ती प्रक्रिया दोबारा आगे बढ़ रही है। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए परीक्षा अक्टूबर में प्रस्तावित होने के कारण परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और पदस्थापना में समय लगने की आशंका है। ऐसे में विद्यार्थियों को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

40 शिक्षक छात्रावासों में संलग्न

एक ओर स्कूलों में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग के 40 शिक्षकों को छात्रावासों और आश्रमों में संलग्न किया गया है। इनमें कई आश्रम और छात्रावास आदिवासी विभाग के अधीन संचालित हैं।

कोरबा जिले में कुल 186 आश्रम और छात्रावास संचालित हैं, जहां अधीक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण शिक्षकों को अधीक्षक की अस्थायी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नियम के अनुसार, इन सभी 40 शिक्षकों की नियुक्ति स्कूलों में है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बीच उन्हें दूसरे कार्यों में संलग्न किए जाने से पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।