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चंद्रनगर-जटराज में घर टूटने का डर, प्रभावित परिवार बोले- पहले दो बसाहट और मूलभूत सुविधाएं

Korba News: कोरबा के चंद्रनगर-जटराज में एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित करीब 200 परिवारों ने बिना बसाहट मकान खाली कराने के दबाव का आरोप लगाया है।
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CG News:

CG News: बिना बसाहट मकान खाली कराने का आरोप(photo-patrika canva create)

SECL Kusmunda Project: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एसईसीएल की कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित दर्री तहसील के मसाहती ग्राम चंद्रनगर-जटराज के करीब 200 परिवारों के सामने एक बार फिर घर बचाने का संकट खड़ा होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के वर्षों बाद भी उन्हें उचित बसाहट नहीं मिली है और अब बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए मकान खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने मकान नहीं हटाने पर डोजरीकरण की कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने का भी दावा किया है।

Korba Resettlement Issue: कई चरणों में अधिग्रहित हुई जमीन

ग्रामीणों के अनुसार, कुसमुंडा परियोजना के लिए उनकी जमीन वर्ष 1978-79, 1982-83, 1984-85 और अंतिम चरण में वर्ष 2010 में अधिग्रहित की गई थी। उनका कहना है कि अंतिम चरण के अधिग्रहण को भी करीब 16 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और बसाहट की व्यवस्था अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

बिना बसाहट मकान खाली कराने का आरोप

चंद्रनगर-जटराज के ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने कुसमुंडा परियोजना के महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल और दर्री तहसीलदार प्रियंका चंद्रा की ओर से कार्रवाई की बात कहे जाने का दावा किया है। ग्रामीणों के मुताबिक, मकान नहीं हटाने पर डोजरीकरण की कार्रवाई की बात कही जा रही है। उनका आरोप है कि इस दबाव के कारण कुछ परिवारों ने अपने मकान तोड़ना भी शुरू कर दिया है।

‘पहले बसाहट, फिर हटाएं मकान’

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पहले मकान हटाने और बाद में बसाहट व मुआवजा देने की मौखिक बात कही जा रही है। उनका सवाल है कि यदि प्रस्तावित बसाहट स्थल पर सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो परिवार वहां कैसे रहेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि पहले प्रभावित परिवारों को रहने की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और इसके बाद ही पुराने मकानों को हटाने की कार्रवाई की जाए।

बरसात में बेदखली से बढ़ी चिंता

ग्रामीणों ने बरसात के दौरान मकान खाली कराने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने और बुजुर्गों व महिलाओं के सामने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां खड़ी होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय से पुनर्वास की मांग के बावजूद कई परिवार अब भी बसाहट की सुविधा से वंचित हैं।

28 सितंबर को कलेक्ट्रेट तक दंडवत न्याय यात्रा

मकान खाली कराने के कथित दबाव के विरोध में ग्रामीणों ने 28 सितंबर को दंडवत न्याय यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। यात्रा सुबह 9 बजे घंटाघर चौक से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचेगी। ग्रामीणों के मुताबिक, यात्रा में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और स्कूली बच्चों समेत करीब 200 लोग शामिल होंगे।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने बिना बसाहट मकान खाली कराने और डोजरीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को पहले वैकल्पिक बसाहट उपलब्ध कराई जाए और नए मकान बनाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।