बिजली बिल भुगतान की प्रक्रिया तो ऑनलाइन है, लेकिन इसमें त्रुटि सुधार की प्रक्रिया दफ्तर पहुंचकर ही पूरी करनी होती है
कोरबा . बिजली बिल में अनगिनत त्रुटियां और इसे सुधरवाने के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान न होने से आम लोग बेहद परेशान हैं। बिलों में ऐसी-ऐसी त्रुटियां हैं कि आम उपभोक्ताओं का पीछा नहीं छोड़ती और विभाग के इंजीनियर व स्टाफ पीडि़त उपभोक्ताओं का दर्द समझने के बजाय उन्हें विभागीय दावं-पेंच में उलझा कर परेशान कर रहे हैं।
यही कारण है कि लोग विभाग के चक्कर काटने को विवश हैं। त्रुटि सुधरवाने के लिए घण्टों कतार में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। बिजली बिल भुगतान की प्रक्रिया तो ऑनलाइन है। लेकिन इसमें त्रुटि सुधार की प्रक्रिया विभाग के दफ्तर पहुंचकर ही पूरी करनी होती है। विभाग में बिजली बिल को लेकर दोहरी प्रक्रिया अपनाई जाती है। एक ओर जहां उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए बिल भुगतान करने के लिए ऑनलाईन भुगतान का विकल्प मौजूद है। वहीं विभाग के पास बिल बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन है। जिसका मतलब यह हुआ कि यदि उपभोक्ताओं ने ड्यू डेट समाप्त होने के बाद पेमेंट किया तो यह राशि अगले माह के बिल में जोड़ दी जाएगी।
दरअसर निर्धारित अवधि तक चुकता किए गए बिल के आधार पर ही आगामी माह के बिल की छपाई की जाती है। जिसके कारण ड्यू डेट के बाद किए गए भुगतान का उल्लेख बिल में नहीं किया जाता। इसे सुधारने के लिए फिर से पिछले माह की रसीद लेकर संबंधित बिजली विभाग के दफ्तर जाना होगा तब जाकर बिजली बिल सुधारा जाएगा। जिसके बाद वास्तविक बिल का निर्धारण किया जा सकेगा।
इस संबंध में सहायक अभियंता बी.बी. नेताम का कहना है कि मियाद समाप्त होने के बाद बिल का पेमेंट करने पर यह अगले माह के बिल में स्वत: ही जुड़ जाता है। इसके अलावा इस महीने स्वेच्छा अनुदान की राशि को भी बिल में जोड़ा गया है। इसे त्रुटि समझकर बिल सुधरवाने आ रहे हैं।
स्वेच्छा अनुदान की राशि
इस माह विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के बिजली बिल में स्वेच्छा अनुदान की राशि को जोड़ा गया है। यह राशि वर्ष में एक बार उपभोक्ताओं से वसूली जाती है। इसका निर्धारण सालाना खपत के आधार पर किया जाता है।