
कोरबा . बैंक कॉलोनी के 95 परिवार पिछले 8 साल से मुफ्त में पानी पी रहे थे। लगातार नोटिस के बाद भी बकाया जमा करने रूचि नहीं ली जा रही थी। बकाया पहुंचकर 11 लाख तक पहुंच गया है। लिहाजा निगम ने पूरी कॉलोनी के नल कनेक्शन को काट दिया। हड़बड़ाए कर्मचारी एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक के पास शिकायत लेकर पहुंचे। बैंक अधिकारी ने निगम आयुक्त से कुछ दिन की मोहलत मांगी। तब जाकर कनेक्शन जोड़ा गया।
दर्री जोन के अन्तर्गत आने वाले जमनीपाली के बैंक कॉलोनी में एसबीआई के 95 मकान है। इन भवनों में सारी सुविधाएं बैंक प्रबंधक को करनी होती हंै। पेयजल की सुविधा नगर निगम के माध्यम से की जाती है। इसके ऐवज में प्रति माह टैक्स निगम को जमा करना होता है। लेकिन पिछले 8 साल से बैंक कॉलोनी से एक भी पैसा निगम में जमा नहीं हो रहा था। पिछले पांच साल में कई बार निगम कर्मी घर-घर जाकर पैसा वसूली करने पहुंचे, लेकिन कोई टैक्स देने को राजी ही नहीं था।
पिछले सप्ताह बकायदा निगम कर्मचारी नोटिस पहुंचाने कॉलोनी पहुंचे थे। लेकिन यहां भी अधिकांश ने नोटिस नहीं लिया। इसे देखते हुए निगम ने मंगलवार की रात कॉलोनी का कनेक्शन काट दिया गया। बुधवार को दिनभर कॉलोनी में पानी नहीं आया। इसे लेकर बैंक कर्मचारी नाराज हो गए। बुधवार से लेकर गुरूवार तक दो दिन तक पानी नहीं आने के बाद कर्मचारी पहले निगम के जोन कार्यालय पहुंचे।
यहां लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। यहां से बात ना बनते देख अधिक संख्या में कर्मचारी एसबीआई के घंटाघर स्थित मुख्य कार्यालय पहुंचे। क्षेत्रीय प्रबंधक प्रभात बोस से मिलकर अपनी समस्या बताई। क्षेत्रीय प्रबंधक ने निगम आयुक्त से जल्द पानी बिल अदा करने की मोहलत मांगी। इसके बाद फिर नल कनेक्शन जोड़ा गया।
9 लोगों ने जमा कराया टैक्स
निगम के इस कार्रवाई के बाद 9 लोगों ने आनन-फानन में टैक्स जमा किया। गुरूवार को जोन कार्यालय में हंगामे की स्थिति रही। दरअसल 9 लोगों का कनेक्शन जोडऩे के बाद अन्य लोग भी मांग करने लगे। जब निगम ने पैसा जमा करने को कहा। तो लोगों का कहना था कि जब से वे रह रहे हैं। तब से ही बिल जमा करेंगे। निगम के रिकार्ड में मकान नंबर के हिसाब से बिल भेजा जाता है। पूर्व में नाम के साथ बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन बैंक प्रबंधक द्वारा नए कर्मचारियों की सूची ही निगम को नहीं भेजी जाती थी।
बैंक प्रबंधन की बड़ी लापरवाही
95 परिवारों को दो दिन तक पानी नहीं मिला। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही एसबीआई बैंक प्रबंधन की है। बैंक में एक जगह पर अधिकतम तीन साल की पदस्थापना होती है। कर्मचारी की दूसरा जगह तबादला के बाद दूसरा कर्मचारी भी वहां रहने आ जाता है। लेकिन पहले के कर्मचारी द्वारा पानी का बिल नहीं जमा किया जाता। अब जो नया रहने वहां आता है। उसको पिछला बकाया जोड़कर बिल थमाया जाता है। विवाद यहीं होता है कि आखिर वह कर्मचारी पिछला बिल क्यों दे। इसके लिए बैंक प्रबंधन को जवाबदारी तय करनी चाहिए। कि मकान छोडऩे से पहले बिजली व पानी का नो ड्युज क्लीयर करवाया जाएं। यही वजह है कि महज 60 रूपए प्रति माह बिल बढ़कर 11 लाख तक जा पहुंचा है।
29वें बार नोटिस जारी हुआ था बैंक कॉलोनी को
पानी का बिल अदा करने को लेकर चार दिन पहले जारी हुआ नोटिस 29वें बार था। हर साल पांच से छह बार नोटिस बैंक कॉलोनी को थमाया जा रहा था। यहां तक कि निगम के अधिकारी पिछले साल फरवरी में बैंक के अधिकारियों से मुलाकात कर समय पर टैक्स देने की बात कही गई थी। लेकिन उस समय अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। पिछले महीने निकाय मंत्री की बैठक में अधिक बकाएदारों के खिलाफ कार्रवाई कर वसूली के लिए निर्देश दिए गए थे। लिहाजा यह कार्रवाई की गई।
Published on:
19 Jan 2018 10:12 am
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