मीजल्स -रूबेला वायरस से गंभीर और जानलेवा बीमारी होती है। गर्भावस्था में मीजल रूबेला हो जाए तो गर्भापात की आशंका बढ़ जाती है।
कोरबा. स्वास्थ्य संयोजकों की हड़ताल से मीजल्स-रूबेला टीकारण अभियान को झटका लगा है। सोमवार से शुरू होने जा रहे अभियान को स्वास्थ्य विभाग ने स्थगित कर दिया है। बच्चों को बीमारियों से दूर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मीजल्स रूबेला अभियान को चालू करने की तैयारी की थी। इसके लिए वैक्सीन कोरबा पहुंच गई थी। टीम का गठन भी कर लिया गया था। इस बीच स्वास्थ्य संयोजक हड़ताल पर चले गए।
कोरबा सहित प्रदेश के सभी जिले ेमें टीकाकरण अभियान ठप हो गया है। स्वास्थ्य संयोजकों की हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग के पास अब कोई मैदानी अमला नहीं बचा है, जो टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ा सके। इससे परेशान स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को स्थगित करने के लिए आदेश जार कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अगली तिथि की घोषणा तक मीजल्स- रूबेला को स्थगित किया जाता है। अभियान के तहत नौ माह से १५ साल तक के सभी बच्चों को मीजल्स रूबेला का टीका लगाया जाना है।
मीजल्स -रूबेला वायरस से गंभीर और जानलेवा बीमारी होती है। गर्भावस्था में मीजल रूबेला हो जाए तो गर्भापात की आशंका बढ़ जाती है। बच्चों में जन्मजात विकृतियां होती है। इसकी रोकथाम के लिए सरकार ने गंभीरता दिखाई है। छत्तीसगढ़ में भी मीजल रूबेला की रोकथाम के लिए मुहिम चालू की जा रही है।
तीन बीमारियों से रक्षा
मीजल, मंप्स और रूबेला (एमएमआर) जानलेवा वायरस है। लेकिन इसकी रोकथाम टीकाकरण के जरिए की जा सकती है। एमएमआर रूबेला का टीका बच्चों को तीन बीमारियों खसरा, गलगंड (मंप्स) और रूबेला से बचाता है।
घर जाकर नहीं लगेगा
इस अभियान को अधिक व्यवस्थित तरीके से चलाया जाएगा। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर जाकर बच्चों को टीकाकरण नहीं करेंगे बल्कि टीकाकरण स्कूल, आबां केन्द्रों व सामुदायिक जगहों पर किया जाएगा।
स्कूलों ने मांगी पालकों से सहमति
स्वास्थ्य विभाग ने मीजल्स रूबेला का टीका लगाने के लिएस्कूलों को चयन किया है। विभाग नौ माह से १५ साल के सभी बच्चों को टीका लगानाा चाहता है। लेकिन निजी स्कूलों का कहना है कि पालकों से सहमति मिलने पर ही टीका लगाया जाएगा। जिन बच्चों के अभिभावक सहमति नहीं देंगे, उन्हेें टीका नहीं लगाया जाएगा।
हवा मेें फैलता है वायरस
मीजल्स, मंप्स और रूबेला वायरस का वायरस हवा में फैलता है। यदि कोई मरीज पहले से संक्रमित है तो इसका वायरस स्वस्थ व्यक्ति को निशाने पर लेता है। इससे बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं।
लक्षण
खसरा:
खसरा के वायरस से ददोरा, खांसी, नाक का बहना, आंखों में जलन और तेज बुखार
कानों में संक्रमण, नीमोनिया, बच्चों को झटका आना, घूरती आंखे, दिमाग को नुकसान और अंत में मौत तक हो जाती है।
मंप्स:
मंप्स से सिर में दर्द, तेज बुखार, मांस पेशियों में दर्द, भूख नहीं लगना, ग्रंथियों में दर्द
बांझपन, दिमागी बुखार
रूबेला:
महिलाओं में आथ्राइटिस और हल्का बुखार
महिला को रूबेला होने पर गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा, बच्चों में जन्मजात दोष।