अगस्त में चालू होगा अभियान
कोरबा . स्वास्थ्य विभाग मीजल्स-रूबेला वायरस की रोकथाम के लिए कोरबा में एक अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके तहत नौ माह से 15 साल तक के सभी बच्चों को मीजल्स रूबेला का टीका लगाया गया जाएगा। कोरबा में इस मुहिम की शुरूआत अगस्त में होगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारी में जुट गया है।
मीजल्स -रूबेला वायरस से गंभीर और जानलेवा बीमारी होती है। गर्भावस्था में मीजल रूबेला हो जाए तो गर्भापात की आशंका बढ़ जाती है। बच्चों में जन्मजात विकृतियां होती है। इसकी रोकथाम के लिए भारत सरकार ने गंभीरता दिखाई है।
छत्तीसगढ़ में भी मीजल रूबेला की रोकथाम के लिए मुहिम चालू की जा रही है। अगस्त में कोरबा जिले में मीजल रूबेला के खिलाफ टीकाकरण अभियान चालू होगा। इसके लिए कोरबा जिले में तैयारी शुरू हो गई है। टीका नौ माह की उम्र से लेकर 15 साल तक के बच्चों को लगना है। विभाग टीकाकारण की जरूरत को आंकलन करने में लगा हुआ है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार जिले में मीजल रूबेला की चार लाख वैक्सिन की जरूरत होगी। विभाग का कहना है कि टीकाकरण प्राथमिक स्कूल में पढऩे वाले सभी बच्चों का किया जाएगा। आंगनबाड़ी को भी केन्द्र बनाया जाएगा। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा।
तीन बीमारियों से रक्षा
मीजल, मंप्स और रूबेला (एमएमआर) जानलेवा वायरस है। लेकिन इसकी रोकथाम टीकाकरण के जरिए की जा सकती है। एमएमआर रूबेला का टीका बच्चों को तीन बीमारियों खसरा, गलगंड (मंप्स) और रूबेला से बचाता है।
लक्ष्ण
खसरा : 01. खसरा के वायरस से ददोरा, खांसी, नाक का बहना, आंखों में जलन और तेज बुखार
02. कानों में संक्रमण, नीमोनिया, बच्चों को झटका आना, घूरती आंखे, दिमाग को नुकसान और अंत में मौत तक हो जाती है।
मंप्स : 01. मंप्स से सिर में दर्द, तेज बुखार, मांस पेशियों में दर्द, भूख नहीं लगना, ग्रंथियों में दर्द
02. बांधपन, दिमागी बुखार
रूबेला : 01. महिलाओं में आथ्राइटिस और हल्का बुखार
02. महिला को रूबेला होने पर गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा, बच्चों में जन्मजात दोष जैसे सिर का बड़ा होना कटे फेट अंग
हवा में फैलता है रूबेला वायरस
मीजल्स, मंप्स और रूबेला वायरस का वायरस हवा में फैलता है। यदि कोई मरीज पहले से संक्रमित है तो इसका वायरस स्वस्थ व्यक्ति को निशाने पर लेता है।