विद्युत संयंत्र को यह लाभ ग्रिड सिस्टम की मांग के अनुरूप
कोरबा. छत्तीगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के हसदेव ताप विद्युत गृह (एचटीपीएस ) कोरबा पश्चिम ने चालू वित्तीय वर्ष में 21 सितंबर 2018 तक 43 करोड़ 65 लाख 70 हजार 809 रूपए का लाभ अर्जित किया है। विद्युत संयंत्र को यह लाभ ग्रिड सिस्टम की मांग के अनुरूप लगातार विद्युत उत्पादन करने से हुआ है।
हसदेव ताप विद्युत गृह की विद्युत उत्पादन क्षमता 1340 मेगावाट है। यहां 210 मेगावाट की चार इकाइयां और विस्तार परियोजना के तहत 500 मेगावाट की एक आधुनिक इकाई संचालित हो रही है। मुख्य अभियंता राजेश वर्मा ने कहा कि यह सफलता अधिकारियों व कर्मचारियों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।
21 सितंबर 2018 की स्थिति में विद्युत संयंत्र की पांचों इकाइयों में फ्यूल से 4 करोड़ 65 लाख 66 हजार 933 रूपए, अनशेड्यूल्ड इंटरचेंज (यूआई) से 15 करोड़ 89 लाख 54 हजार 619 रूपए, फिक्सड कास्ट से 23 करोड़ 10 लाख 49 हजार 257 रूपए का अतिरिक्त लाभ मिला है।
नए राज्य के गठन के बाद इन 18 वर्षों में पावर कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता (जल व ताप विद्युत) 3424.70 मेगावाट हो चुकी है। वर्ष 2000 में नवंबर की स्थिति में विद्युत उत्पादन क्षमता 1360 मेगावाट थी।
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दर्री सब स्टेशन की क्षमता बढ़ी, जल्दी पकड़ में आएगी लाइन की हर खराबी
कोरबा. दर्री थाना और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लगे ट्रांसफार्मर को नए सब स्टेशन से जोड़ दिया गया है। इरीगेशन कॉलोनी में स्थापित विद्युत सब स्टेशन की क्षमता को बढ़ाकर 3.1 से 5 एमबीए कर दिया गया है। इससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। दर्री क्षेत्र में विद्युत वितरण की लचर व्यवस्था को ठीक करने में सब स्टेशन की क्षमता में वृद्धि बेहद कारगर सिद्ध होगा।
विद्युत वितरण विभाग ने शहरी क्षेत्र के दर्री जोन के प्रमुख सबस्टेशन इर्रिगेशन कॉलोनी की क्षमता में इजाफा कर दिया है।
3.15 के स्थान पर पांच एमबीए क्षमता का पावर ट्रांसफॉर्मर सबस्टेशन में लगाकर इसे चार्ज किया जा चुका है। क्षमता बढ़ाए जाने से उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज सहित फॉल्ट ढूंढने में होने वाली देरी से बिजली गुल रहने की समस्या से निजात मिलेगी।दरअसल दर्री डेम के किनारे स्थित दर्री ग्रामीण के सब स्टेशन से पूरे क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति की जाती है।
जिसके मद्देनजर विभाग ने इर्रिगेशन कॉलोनी के सबस्टेशन की क्षमता पांच एमबीए करने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया था। इस पर स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू कर दिया गया था। पूर्व में सबस्टेशन की क्षमता 3.1 एमबीए थी। इसे बढ़ाकर अब पांच एमबीए कर दिया गया। जिसके लिए यहां पावर ट्रांसफॉर्मर भी इंस्टॉल किया गया है।