चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने की नोटिस निरस्त करने की मांग
कोरबा. सर्विस टैक्स के तीन साल पुराने मामले में केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने लगभग एक हजार व्यापारियों को कारण बताओ नोटिस जारी है। इससे व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। चेम्बर ऑफ कामर्स और टैक्स बार एसोसिएशन ने विभाग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। अन्यथा हाइकोर्ट में रिट दायर करने की बात कही है।
वित्तीय वर्ष 2013- 14 में सर्विस टैक्स जमा नहीं करने का हवाला देकर केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने कोरबा जिले में एक हजार व्यापारियों को नोटिस जारी किया है। इसमें ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार, किराना व कपड़ा इत्यादि के व्यापारी शामिल हैं। विभाग ने दो दिन में नोटिस का जवाब मांगा है।
इससे व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सर्विस टैक्स विभाग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारी लामबंद हो गए हैं। उनको टैक्स बार एसोसिएशन और चाटर्ड अकाउंटेंट संघ का भी समर्थन मिला है। संघ ने सर्विस टैक्स विभाग की कार्रवाई को कानून के विपरित बताते हुए नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है। नोटिस की खामियों को बताते हुए हाइकोर्ट में रिट याचिका करने की बात कही है। नोटिस के खिलाफ चेम्बर और टैक्स बार एसोसिएशन ने मीडिया से परेशान बताई। इस दौरान चेम्बर अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल, महामंत्री यूनुस मेमन, टैक्स बार एसोसिएशन के अमर अग्रवाल और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के राजेन्द्र तिवारी उपस्थित थे।
डॉक्टरों को भी नोटिस
विभाग ने शहर के कुछ डॉक्टरों को भी नोटिस जारी किया है। उनपर लाखों रुपए बकाया होने का आरोप लगाया है। नोटिस से डॉक्टर परेशान हैं। उनका कहना है कि डॉक्टरों की सर्विस को सर्विस टैक्स से मुक्त रखा गया है। इसके बाद भी नोटिस जारी किया गया है।
बार ने कहा बिना जांच कार्रवाई
टैक्स बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि सर्विस टैक्स विभाग ने आयकर विभाग से दस्तावेज प्राप्त किया। जिन लोगों को आयकर की धारा 194 (सी) के तहत भुगतान हुआ था, उन्हेें नोटिस जारी कर दिया। बिना तैयारी सभी को नोटिस जारी करने से परेशानी हुई है।