- छह हजार से अधिक हितग्राही का रिकार्ड पता नहीं चल रहा
कोरबा. झुग्गी मुक्त शहर के लिए निगम ने पहले पूरे शहर में सर्वे कराया था। उस दौरान साढ़े ४२ हजार से अधिक आवेदन निगम को मिले थे। उसके बाद जब सत्यापन कराया गया तो इसमें से ३६ हजार हितग्राही ही सामने आए जबकि लगभग छह हजार से अधिक हितग्राही का रिकार्ड पता नहीं चल रहा है।
शहर में परिसीमन से पहले जब हितग्राहियों के लिए सर्वे कराया गया था उस समय निगम में ५७ वार्ड थे। ५७ वार्ड में लगभग साढ़े ४२ हजार हितग्राहियों ने इसके लिए फार्म भरा था। बाकायदा राशन कार्ड की फोटोकापी सहित पूरी जानकारी भरी गई थी। योजना के बदलने के बाद निगम ने अब तक दो बार सर्वे करा लिया।
पहली बार यह आंकड़ा ३० हजार के आसपास था जबकि दूसरी बार शासन द्वारा नियुक्त सलाहकार की टीम ने किया। पूरे चार माह तक उन लोगों की तलाश की गयी, जिन्होंने फार्म भरा था। लेकिन साढ़े छह हजार से अधिक ऐसे हितग्राही ऐसे हैं जिनका कोई पता नहीं चल रहा है। हालांकि इसके पीछे कई वजह बताई जा रही है। कई बस्तियों मेंं काम करने वाले मजदूर वापस लौट जाते हैं। तो कई बार दस्तावेजों में कमी की वजह से बाद में हितग्राही सामने नहीं आते हैं। पहली बार सर्वे करने वाली कंपनी द्वारा गड़बड़ी किए जाने की संभावना भी जतायी जा रही है।
50 से ज्यादा बस्तियों में स्लम एरिया अधिक
शहर में ५० से ज्यादा ऐसी बस्तियां हैं जहां स्लम एरिया का दायरा अधिक है। जिसमें राताखार में २६.१९ हेक्टयेर, इमलीडुग्गु में १४.९२ हेक्टयेर, ढोढ़ीपारा में १०.४० हेक्टयेर, बुधवारी बाजार में १९.१८ हेक्टयेर, कृष्णानगर में १२.९१, दादरखुर्द में २१.४३ हेक्टयेर, नेहरूनगर में २२.६१ सहित आजाद नगर, अयोध्यापुरी, चोरभटठ्ी, नागिन भाठा, सुमेधा भाठा, रामपुर, भदरापारा, कैलाशनगर, मुड़ापार अन्य स्लम बस्तियों में भी स्लम का दायरा अधिक है।
किस बस्ती में फार्म की संख्या में आई कमी
साकेत नगर -४५५
इमलीडुग्गू -२९१
देवांगन पारा -२९५
शारदा विहार-४३३
कांशीनगर -५९०
जमनीपाली -५१३
इंदिरा नगर -५१९
दर्रीखार क्रमांक -१ ७९२
-कंपनी द्वारा सर्वे कर पूरे क्षेत्र का डीपीआर बनाती है, ऐसे में जिस भी जगह के लिए मकान का निर्माण या फिर आवंटन करना होता है वहां के हितग्राहियों को एक बार और सत्यापन किया जाएगा- भागीरथ वर्मा, अधीक्षण अभियंता, निगम कोरबा