कोरबा

CG Analytical News : इतने गांव में रहने वाले ग्रामीणों के दांत हो रहे खराब, हाथ-पांव हो रहे टेढ़े, वजह जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

-पानी में फ्लोराइड का स्तर बढऩे लगा है। दूसरी तरफ पीएचई के पास किसी प्रकार का ठोस उपाय तक नहीं है।

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Jun 22, 2018
CG Analytical : इतने गांव में रहने वाले ग्रामीणों के दांत हो रहे खराब, हाथ-पांव हो रहे टेढ़े, वजह जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

कोरबा. 33 गांव मेें 565 ग्रामीणों के दांत फ्लोरिसिस की वजह से खराब होने लगे हैं, वहीं 66 के हाथ-पांव मेें इसका सीधा असर पडऩे लगा है। फ्लोरिसस सेल की छह माह की जांच में ये आंकड़े सामने आए हैं। पानी में फ्लोराइड का स्तर बढऩे लगा है। दूसरी तरफ पीएचई के पास किसी प्रकार का ठोस उपाय तक नहीं है।

जनवरी से लेकर अब तक जिला फ्लोरिसिस सेल द्वारा जिले के फ्लोराइड प्रभावित गांव जैसे आमाटिकरा, फुलझर, कोआटाल, बिंझरा, रैनपुर, कोरबा सहित 33 गांवों में जाकर पानी के सेंपल के साथ वहां के ग्रामीणों का हेल्थ चेकअप किया गया। अब तक सेल द्वारा इन सभी गांव में कैंप लगाया गया। जहां 565 ग्रामीणों मेें शुरूआती लक्षण मिले। जिनके 565 ग्रामीणों के दांतों मेंं इसका असर देखा गया। वहीं 66 के हाथ-पांव मेें समस्या देखने को मिली। कई जगह ग्रामीणों के हाथ-पांव टेढ़े-मेढ़े मिले।

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जिन मरीजों के दांतों में समस्या है उनका इलाज स्थानीय स्तर पर चल रहा है। सेल के अनुसार कई मरीजों में सुधार होने लगा है। लेकिन प्रभावित लोगों को इंतजार करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि पीएचई के आयरन रिमूवल प्लांट की तरह फ्लोराइड रिमूवल प्लांट की स्थिति भी कबाड़ जैसी हो चुकी है।उस गांव को फ्लोराइड प्रभावित गांव की सूची से बाहर कर दिया गया। लेकिन मशीनों ने किस हद तक ग्रामीणों को फायदा मिल रहा है इसकी तस्दीक कभी नहीं की गई।

बच्चे व युवा में फ्लोराइड की वजह से फ्लोरिसस बीमारी बढ़ती जा रही है। बुजुर्गों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इसके लिए व्यवस्था क्या कर रहा है? 39 में से 6 मशीनें ऐसी है कि किसी तरह काम कर रही है। 33 कबाड़ हो चुकी है। 90 फीसदी मशीनों के खराब होने के पीछे जिम्मेदार कौन है इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है। वर्तमान के अफसर पहले के अधिकारियों पर दोष मढ़ रहे हैं। इस बीच ग्रामीणों को शुद्ध पानी की दरकार और बढ़ते चली गई।

पिछले बार सर्वे करा लिया गया, लेकिन रिपोर्ट पर काम नहीं
पीएचई ने डेढ़ साल पहले नागपुर की नीरी से जिले के सभी ब्लॉक के ऐसे प्रभावित गांव में पानी की सेंपलिंग की। लगभग १६९ गांव के ३२० बसाहट तक टीम सेंपल के लिए पहुंची। इनमें ६२० हैंडपंपों में से ५११ हैंडपंप में फ्लोराइड की मात्रा मानक स्तर से अधिक पाई गई थी। इन सभी बसाहट तक फ्लोराइड ने अपने पैर पसार चुका है। लाख कोशिश और दावों के बीच भी फ्लोराइड का दायरा बढ़ रहा है। सर्वे तो करा लिया गया लेकिन उस रिपोर्ट के हिसाब से किसी तरह काम नहीं किया गया।

मशीन लगाने की कोई योजना नहीं, हैडपंप कर रहे सील
सर्वे में जिस भी बसाहट में फ्लोराइड अधिक मात्रा में सामने आया है। उन जगहों में फ्लोराइड से निजात दिलाने के लिए पीएचई के पास तत्कालिक तौर पर कोई बड़ी योजना नहीं है। 511 हैंडपंपों में से 472 को सील कर दिया गया है। ताकि लोग दूषित पानी ना पिएं। लेकिन अब ग्रामीणों के सामने परेशानी है कि वे साफ पानी के लिए कहा ंजाएं। ये सारी बसाहट पहाड़ी क्षेत्र में है। लिहाजा शुद्ध पेयजल के लिए और भी परेशानी बढ़ेगी।

-अब तक 33 गांव में कैंप लगाया गया जहां 565 ग्रामीणों के मरीजों के दांतों में तो वहीं ६६ के हाथ-पांव में इसके लक्षण मिले हैं। इनका उपचार कराया जा रहा है। अगले सप्ताह से स्कूलों में कैंप लगाया जाएगा। डॉ. नरेंद्र जायसवाल, सलाहकार, जिला फ्लोरिसिस सेल

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Published on:
22 Jun 2018 11:28 am
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