
बरबसपुर। बौरीडांड़ जंक्शन से बैकुंठपुर रोड स्टेशन तक रेललाइन दोहरीकरण (Double Rail line) के लिए एमसीबी जिले के 9 गांव में 5.225 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। लेकिन अब तक प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावित 111 किसान चार महीने से 4.78 करोड़ से ज्यादा मुआवजा राशि मिलने की आस लगाए बैठे हैं। लेकिन अभी तक मुआवजा वितरण शुरू नहीं हुआ है। इधर रेलवे ने अधिग्रहित जमीन पर रेलवे दोहरीकरण का निर्माण शुरू कर दिया है। ऐसे में किसान अब मुआवजा राशि वितरण को लेकर संशय में पड़ गए हैं, वे परेशान हैं।
बौरीडांड-अंबिकापुर (सरगुजा) रेललाइन दोहरीकरण परियोजना (Bauridand-Ambikapur double rail line) को लेकर भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरु की गई थी। बौरीडांड से बैकुंठपुर के बीच दोहरीकरण परियोजना में एमसीबी जिले के कुल 9 ग्राम उजियारपुर, बरबसपुर, दर्रीटोला, सरोला, सेमरा, लाई, उदलकछार, शंकरगढ़ एवं बेलबहरा प्रभावित हैं। यहां रेल दोहरीकरण के लिए कुल 6.980 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण हुआ है। इसमें 111 किसान की निजी भूमि 5.225 हेक्टेयर और 28 प्रकरण में 1.755 हेक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है।
इसके एवज में 4 करोड़ 78 लाख 47 हजार 777 रुपए की अवार्ड राशि पारित है। जिला प्रशासन की निगरानी में प्रभावित हितग्राहियों के बैंक खातों की जानकारी तहसीलदार, उप तहसील नागपुर के माध्यम से संकलित की गई थी। लेकिन 3-4 महीने के बाद भी मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हुआ है। गौरतलब है कि बौरीडांड़ जंक्शन से शिवप्रसादनगर तक करीब 79.9० किलोमीटर दोहरीकरण कार्य कराया जाना है। दो खंड में कार्य को विभाजित किया गया है।
बैकुंठपुर रोड से शिवप्रसादनगर खंड और बौरीडांड़ जंक्शन से बैकुंठपुर रोड स्टेशन खंड में दोहरीकरण प्रोजेक्ट (Railway News) को मंजूरी मिली है। इसकी कुल लागत करीब 1 हजार 376.2 करोड़ है। बरबसपुर और उजियारपुर के किसान विजय कुमार ने बताया कि उनकी जमीन अधिग्रहण के एवज में ३ लाख मुआवजा बनाया गया है, जो अब तक नहीं मिला है। किसान श्यामबली ने बताया कि रेलवे लाइन दोहरीकरण करने के लिए मेरी जमीन अधिग्रहित की गई है, लेकिन 98 हजार मुआवजा अब तक नहीं मिला है। अभी रेलवे ने निर्माण भी शुरु कर दिया है।
विकासखंड मनेद्रगढ़ की ग्राम पंचायत उजियारपुर, सोनबरसा आसपास क्षेत्र के किसानों की रेलवे दोहरीकरण लाइन के लिए जमीन अधिग्रहित हुई है। किसानों का कहना है कि मुआवजा अब तक नहीं मिल पाया है। जबकि ठेकेदार ने अधिग्रहण जमीन पर डबल लाइन का निर्माण शुरु कर दिया है। अब किसान पैसे को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
उनका आरोप है कि अधिकारी कहते हैं कि खाते में पैसा डाल दिया गया है, लेकिन अभी तक खाते में पैसा नहीं आ पाया है। किसानों को कोई भी अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा है। इससे किसान चिंतित और परेशान हैं। उनका कहना है कि हम मुआवजा मांगने जाए तो जाएं कहां? कोई हमारा सुनने वाला नहीं है।
किसान पवन कुमार का कहना है कि मेरी जमीन अधिग्रहण के बाद 1 लाख 97 हजार 802 रुपए मुआवजा बनाया गया है। लेकिन अभी तक मुआवजा राशि का वितरण नहीं हुआ है। किसान सुखमतिया ने बताया कि रेलवे लाइन दोपहरीकरण (Rail line doubling) के लिए मेरी जमीन अधिग्रहण कर ५ लाख 38 हजार 2 रुपए मुआवजा बनाया गया है। कई महीने बीतने के बाद भी राशि नहीं मिली है। वहीं किसान गौरीशंकर जायसवाल ने बताया कि जिला प्रशासन व रेलवे ने निर्माण कराने के लिए मेरी जमीन ली है। मुआवजा 54 हजार 700 रुपए है। रेलवे ने काम शुरू कर दिया है, लेकिन पैसा नहीं मिला है।