कोरीया

Independence Day 2021: बापू के स्वदेशी आंदोलन से जुड़े थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा भाई, 78 साल किया खादी का प्रचार

Independence Day 2021: कृष्णा भाई ने अंग्रेजों (Englishmen) की यातनाएं भी सही थीं, गांधी आश्रम (Gandhi Ashram) खादी भंडार के प्रथम संस्थापक के बड़े बेटे ने आजीवन खादी पहनने का लिया है संकल्प

3 min read
Freedom fighter Krishna Bhai

मनेंद्रगढ़.महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi movement)से प्रेरित होकर 78 साल खादी के प्रचार-प्रसार में जीवन समर्पित कर दी। अविभाजित सरगुजा के मनेंद्रगढ़ में गांधी आश्रम खादी भंडार के प्रथम संस्थापक सदस्य के तौर पर खादी के प्रसार में जुटे थे।


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं सर्वोदय नेता विनोबा भावे के खादी वस्त्रों के विचारों से प्रभावित होकर बनारस से एक सक्रिय किशोर क्रांतिकारी ने आजादी के लिए अपनी पूरी जिंदगी खादी वस्त्रों के प्रचार-प्रसार में लगा दी। फिर आजादी के बाद देशभर में खादी भंडार खोलने की मुहिम शुरू हुई। बनारस के युवा क्रांतिकारी का नाम था कृष्ण प्रसाद उपाध्याय था, जो वर्ष 1957 में मनेंद्रगढ़ खादी के प्रचार प्रसार के लिए आए थे।

स्व. उपाध्याय कोरिया के गांधी आश्रम खादी भंडार के प्रथम संस्थापक सदस्य थे। खादी जगत से जुड़े हर व्यक्ति उन्हें कृष्णा भाई के नाम से जानते थे। कृष्णा भाई ने 1942 में बनारस के सेंट्रल जेल में रहे एवं अंग्रेजों की यातनाएं सही। पिछले छह दशक से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उपाध्याय का परिवार झुग्गी झोपड़ी नुमा मकान में निवास कर रहा है। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा साहित्यकार गिरीश पंकज और छोटा सतीश उपाध्याय शिक्षक हैं।

वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होते हुए भी कभी शासकीय सुविधा का लाभ नहीं लिया। उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशी भाई पीपीओ, जो तत्कालीन गांधी आश्रम गोरखपुर के संस्थापक थे। उन्होंने कृष्णा भाई को कई बार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली शासकीय सुविधा से जोडऩे की कोशिश की। परंतु उन्होंने कोई सुविधा का उपयोग नहीं किया।


अंग्रेजों की सही यातनाएं
वाराणसी उत्तर प्रदेश चौखंबा मोहल्ला दूध विनायक मंगला गौरी के रहने वाले स्व कृष्णा भाई ने 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में कई यातनाएं भोगी थी। 18 जनवरी 1943 को जिला जेल वाराणसी में बंदी रहे एवं मार्च 1943 को सेंट्रल जेल बनारस भेज दिया गया था। वहीं 28 अक्टूबर 1943 को जेल से मुक्त कर दिया गया था।

जेल से छूटते ही तत्कालीन सुप्रसिद्ध खादी आंदोलन के नेता अनिल भाई, राजा राम भाई, धीरेंद्र भाई, कपिल भाई के साथ दरिद्र नारायण की सेवा एवं खादी के प्रचार प्रसार के लिए जन आंदोलन खड़ा किया।

फिर आचार्य कृपलानी एवं विचित्र नारायण शर्मा के सानिध्य में आए। कृष्णा भाई कहा करते थे खादी वस्त्र नहीं, विचार है। गांधी आश्रम जबलपुर के मंत्री पद में भी रहे। लगभग 70 वर्षों तक खादी के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित होकर खादी आंदोलन को आगे बढ़ाया। कृष्ण भाई का 18 मार्च 2013 में निधन हो गया।


परिवार वर्ष 1956 से मनेंद्रगढ़ में निवासरत है
मनेंद्रगढ़ वार्ड नंबर-10 में उनके छोटे पुत्र सतीश उपाध्याय सहित परिवार निवासरत है। उनके बेटे ने अपने पिता की स्मृतियों को याद कर बताया कि मेरे पिता 1956-57 में मनेंद्रगढ़ आकर खादी को जन जन तक पहुंचाने खादी भंडार की स्थापना की थी। मनेंद्रगढ़ खादी भंडार के संस्थापक सदस्य भी रहे।

मनेंद्रगढ़ से ही महात्मा गांधी के खादी स्वदेशी आंदोलन को संचालित करते रहे। उनके बड़े पुत्र गिरीश पंकज ने आजीवन खादी पहनने का संकल्प लिया है। आज भी खादी के अलावा कोई दूसरा वस्त्र नहीं पहनते हैं। उनका कहना है कि खादी से जुडऩा एक तरह से देश भक्ति की स्वदेशी की परंपरा को आगे बढ़ाना है।

उन्होंने मध्य प्रदेश, लखनऊ उत्तर प्रदेश के गांधी आश्रम खादी भंडार में खादी का प्रचार प्रसार किया। स्वदेशी आंदोलन के लिए उनके कार्य को आज खादी जगत से जुड़े हर व्यक्ति याद करते हैं।

Published on:
14 Aug 2021 09:49 pm
Also Read
View All