कोरीया

Water crisis: 1.59 करोड़ रुपए खर्च फिर भी पेयजल संकट, ढोढ़ी से पानी लाती हैं महिलाएं, वह भी पीने लायक नहीं

Water crisis: पीएचई विभाग द्वारा जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट को लेकर अपनाया जा रहा उदासीन रवैए की वजह से बनी स्थिति, 5 प्रोजेक्ट का काम पूरा लेकिन भीषण गर्मी में पीने का नहीं मिल रहा पानी

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Villagers took drinking water from 1 km away (Photo- Patrika)

बैकुंठपुर. कोरिया जिले के वनांचल ब्लॉक सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत सुंदरपुर में गर्मी बढऩे के साथ ही जल संकट गहराने लगा है। कई हैंडपंप का जल स्तर नीचे (Water crisis) जाने के कारण ग्रामीण ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर हैं। हालांकि जल जीवन मिशन के तहत 1.59 करोड़ के 5 प्रोजेक्ट पर काम करा चुके हैं। बावजूद भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है।

जल जीवन मिशन के कार्यों को कराने में पीएचई की उदासीन रवैये के कारण ग्रामीण भीषण गर्मी में पेयजल के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। गांव के लोग गंदे और बदबूदार ढोढ़ी के पानी को पीने (Water crisis) के लिए मजबूर हैं। हालात इतने बद्तर हैं कि ग्रामीणों को करीब 1 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। जो पानी मिलता है, वह भी पीने लायक है।

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Well and dhodhi water (Photo- Patrika)

जल जीवन मिशन के तहत 4 साल पहले गांव में घर-घर नल लगा दिए गए। सोलर टंकियां भी स्थापित कर दी गईं। लेकिन आज तक नलों से एक बूंद पानी (Water crisis) नहीं नहीं मिला है। मामले में ग्रामीण आक्रोशित हैं। वर्तमान में ग्रामीण ढोढ़ी का पानी पी रहे हैं। ढोढ़ी के चारों ओर कोई सुरक्षा घेरा नहीं है। इससे हादसे का डर बना हुआ है। छोटे-छोटे बच्चे कुओं में कूदकर नहाते नजर आते हैं।

रेकॉर्ड में 28 हैंडपंप, सिर्फ 4 खराब

पीएचई के रेकॉर्ड में ग्राम पंचायत सुंदरपुर में 28 हैंडपंप लगे हैं। इसमें 4 हैंडपंप बंद है। इसके अलावा 4 सोलर पंप और 1 सिंगल फेस पावर पंप से पेयजल (Water crisis) उपलब्ध करा रहे हैं। बावजूद ग्रामीण हैंडपंप, सोलर सिस्टम की बजाय ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर हैं। जबकि ग्राम पंचायत सुंदरपुर की जनसंख्या 1618 है। वहीं कुल घर 318, जिसमें 296 घर के आंगन-बाड़ी में नल लगाए गए हैं।

Water crisis: ग्रामीणों का ये है कहना

मानमती का कहना है कि हमें मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है। इससे बीमारियां बढ़ रही हैं, लेकिन दूसरा कोई विकल्प नहीं है। सीमा सिंह कहती है कि कभी-कभी ढोढ़ी का पानी (Water crisis) भी सूख जाता है, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।

जबकि सुशीला सिंह का कहना है कि हम सब ढोढ़ी के पानी पर निर्भर हैं। गांव में घर-घर नल लगे हैं, लेकिन आज तक पानी नहीं आया है। वहीं ग्रामीण फलेंद्र सिंह का कहना है कि खुले कुओं की वजह से कई बार दुर्घटनाएं होती हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं किया गया है।

इतने प्रोजेक्ट लगे

मल्टीविलेज योजना 32.68 करोड़
रेट्रोफिटिंग विलेज 42.53 लाख
सोलर योजना डूमरिया 49.47 लाख
सोलर योजना हरिजनपारा 24.46 लाख
पीडब्ल्यूएसएस योजना 67.28 लाख

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Published on:
16 Apr 2026 03:35 pm
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