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राजस्थान के कांग्रेस नेता आबिद कागजी फरार घोषित, कोर्ट के आदेश जारी, जानें पूरा मामला

Rajasthan News: राजस्थान से जुड़ा एक बड़ा मामला कोटा कोर्ट में सामने आया है, जहां कांग्रेस नेता आबिद कागजी को अदालत ने फरार घोषित कर दिया।
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May 08, 2026
Congress Leader
फोटो: सोशल मीडिया

Congress Leader Abid Kagzi: कोटा में विशिष्ट न्यायालय एंटी करप्शन ब्यूरो में लंबित एक पुराने फौजदारी प्रकरण में अदालत ने कांग्रेस नेता आबिद कागजी को लगातार अनुपस्थित रहने पर फरार (मफरूर) घोषित कर दिया।

अदालत ने आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की प्रभावी तामील कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत में 4 मई को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान परिवादी पक्ष उपस्थित रहा, जबकि आरोपी अदालत में पेश नहीं हुआ।

कर दिया फरार घोषित

न्यायालय ने पुलिस की तामील रिपोर्ट और अभिलेखों का अवलोकन किया। रिपोर्ट में बताया कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने निवास स्थान से अनुपस्थित चल रहा है और पुलिस के प्रयासों के बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए आरोपी को ‘मफरूर’ यानी कानून की नजर में फरार घोषित कर दिया।

कार्रवाई के आदेश जारी

न्यायालय ने संबंधित थाना पुलिस को गिरफ्तारी वारंट की प्रभावी तामील सुनिश्चित करने और आरोपी के संबंध में आवश्यक जानकारी पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही, आरोपी के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा तहत कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए गए हैं।

APO चल रहे विकास अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भीलवाड़ा जिले की पंचायत समिति कोटड़ी के तत्कालीन विकास अधिकारी रामविलास मीणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। आरोपी अधिकारी वर्तमान में एपीओ चल रहा है। एसीबी कोटा को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अधिकारी के कब्जे से 1 लाख 55 हजार 275 रुपए बरामद किए गए। एसीबी के अनुसार 10 मार्च को सूचना मिली थी कि रामविलास मीणा एपीओ किए जाने के बाद भी पुराने बिल पास कर ठेकेदारों से अवैध राशि वसूल रहा है।

सूचना पर उप पुलिस अधीक्षक अनीष अहमद के नेतृत्व में एसीबी टीम ने कोटा-चित्तौड़गढ़ रोड स्थित हैंगिंग ब्रिज टोल पर आकस्मिक जांच की। जांच के दौरान मीणा की कार की तलाशी ली गई, जिसमें नकद राशि बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी अधिकारी राशि के स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया और बार-बार अपने बयान बदलता रहा। एसीबी ने प्राथमिक जांच में अवैध और भ्रष्ट स्रोत से राशि एकत्रित करने के साक्ष्य मिलने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच एसीबी की स्पेशल यूनिट को सौंपी गई है।

Updated on:
08 May 2026 08:35 am
Published on:
08 May 2026 08:29 am