
कोटा. राजस्थान राज्य अभिलेखागार विभाग के पास संग्रहित पुरालेखों को संरक्षण की दरकार है। शहर में विभाग का कार्यालय है और इतिहास की कहानी कहते पुरालेख भी। लेकिन, उन्हें सलीके से रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।
इन हालातों में पुरामहत्व के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो गया है। सूरजपोल स्थित विभाग के कार्यालय में रियायतकालीन रिकॉर्डों से भरे करीब 6 हजार बस्ते हैं। ये चार मंजिलों में स्थित विभिन्न कक्षों में जैसे-तैस भरे हैं।
नहीं ला पा रहे बूंदी का रिकॉर्ड
जगह की कमी का दंश बूंदी में संग्रहित रिकॉर्ड भी झेल रहा है। वहां संग्रहित रिकॉर्ड को सहेजना मुश्किल हो रहा है। पर्याप्त भवन नहीं होने से बूंदी में संग्रहित अभिलेखों को विभाग कोटा नहीं ला पा रहा। बूंदी में करीब एक हजार बस्तों में पुराअभिलेख संग्रहित हैं।
झालाहाउस स्थित अभिलेखागार कार्यालय भवन में करीब 6500 से अधिक बस्तों में सैकड़ों पुराअभिलेख संग्रहित हैं। इनमें कोटा के अलावा झालावाड़ से लाए गए अभिलेख भी शामिल हैं। ये अभिलेख रियासतकालीन हैं। हाड़ौती लिपी, अंग्रेजी, ऊर्दू, अरबी समेत अन्य भाषाओं के अभिलेख हैं।
शोध, इतिहास व जनउपयोग की दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण हैं। कर्मचारियों का टोटा जानकारी के अनुसार यहां कर्मचारियों का भी टोटा है। सहायक पुरालेख अधिकारी, सहायक कार्यालय अधीक्षक, लिपिक प्रथम ग्रेड व प्रयोगशाला सहायक के पद रिक्त हैं।
महेन्द्र खडग़ावत, राजस्थान राज्य अभिलेखागार विभाग के निदेशक का कहना है की पुरालेखों को सुव्यवस्थित करने के लिए कार्यालय परिसर में दो कक्षों का निर्माण करवाया है। इनमें रिकॉर्ड रखने के बाद भी रिकॉर्ड बचता है तो झालाहाउस स्थित खाली कक्षों को लेने का
प्रयास करेंगे।
रामेश्वर बैरवा, राजस्थान राज्य के अभिलेखागार विभाग पुरालेख अधिकारी का कहना है की हमारे पास जो साधन-संसाधन हैं, उनसे दस्तावेज का संरक्षण कर रहे हैं। पिछले दिनों भवन में नवनिर्माण भी करवाया, लेकिन बस्तों की संख्या को देखते हुए कुछ कक्ष और मिले तो बूंदी के दस्तावेज भी यहां लाए जा सकते हैं।