कोटा. 'राजस्थान पत्रिका' और दि एसएसआई एसोसिशन की ओर से केन्द्रीय आम व रेल बजट पर गुरुवार को आयोजित टॉक शॉ आयोजित हुआ।
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मोदी सरकार का आखिरी बजट आगामी चुनाव की पटरी पर दौड़ता नजर आया। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने गांव, खेत और किसान को फोकस कर बजट पेश किया। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में ढांचागत विकास पर जोर दिया, लेकिन लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों को कोई राहत नहीं दी गई। रोजगार सृजन की अनदेखी गई। महिलाओं को खुश करने की कोशिश हुई। वरिष्ठ नागरिकों द्वारा किए जाने वाले निवेश पर कर में छूट का दायरा बढ़ाया गया लेकिन आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाने की लोगों में कसक रह गई है। 'राजस्थान पत्रिका' और दि एसएसआई एसोसिशन की ओर से केन्द्रीय आम व रेल बजट पर गुरुवार को आयोजित टॉक शॉ में विशेषज्ञों ने बजट विश्लेषण के बाद यह बात कही। वरिष्ठ उद्यमी, सीए, एडवोकेट, ऑटोमोबाइल उद्यमी, किसान, व्यापारी, नौकरी पेशा, महिला प्रतिनिधियों ने बजट टॉक शो शिकरत की। टॉक शो में विशेषज्ञों ने बजट को दस में से अंक भी दिए, पेश है रिपोर्ट ...
भाजपा : बजट को सराहा
भाजपा ने आम बजट लोक कल्याणकारी एवं देश को वास्तविक विकास देने वाला बताया है। शहर अध्यक्ष हेमंत विजयवर्गीय, महामंत्री अरविंद सिसोदिया, जगदीश जिंदल, पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार माहेश्वरी, उद्योग प्रकोष्ठ के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश जैन दीपपुरा, युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश कार्य समिति सदस्य विशाल शर्मा, किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री मुकुट नागर, उपाध्यक्ष हुसैन देशवाली, कार्य समिति सदस्य इरशाद अली, ओम आड़वानी ने विकासोन्मुखी बजट बताया है।
कांग्रेस : बताया दिशाहीन
कांग्रेस ने दिशाहीन बजट बताया है। प्रदेश महासचिव पंकज मेहता ने कहा कि उद्योग, व्यापार को घोर निराशा हुई है। बेरोजगारी की समस्या और जटिल होगी। इसमें की गई घोषणाएं कोरी साबित होंगी। शहर अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने दिशाहीन बजट बताया। देहात अध्यक्ष सरोज मीणा ने कहा कि गांव और किसानों की उपेक्षा की है। पीसीसी के पूर्व सदस्य राजेन्द्र सांखला, महासचिव विजय सोनी, प्रवक्ता उपेन्द्र राठौड़ ने कहा कि बजट में कोई राहत नहीं दी है।
व्यापारी : कहा निराशाजनक
कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन व महासचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि बजट में व्यापारी, उद्यमी वर्ग इस बजट से स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है। हाड़ौती उद्योग व्यापार महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र जैन ने निराशाजनक बताया। संजय गोयल, कोषाध्यक्ष, थोक सर्राफ ा संघ, कोटा के कोषाध्यक्ष संजय गोयल ने कहा कि व्यापारियों को कोई राहत नहीं दी गई है।
सबका ध्यान रखा
वरिष्ठ उद्यमी गोविंद राम मित्तल ने 10 में से 5 अंक दिए, उनका कहना है कि वित्त मंत्री ने किसान से लेकर हर वर्ग का बजट में ध्यान रखा, बजट घाटे को नियंत्रित किया। विकास पर प्रद्धितता दिखाई है। कॉपोरेट टैक्स में भी 2 प्रतिशत की राहत दी गई। सबसे बड़ी हेल्थ केयर पॉलिसी घोषित की गई है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और इलाज सुलभ हो सकेगा।
आमूलचूल परिवर्तन नहीं
राजस्थान कपड़ा व्यापार संघ प्रदेश अध्यक्ष गिरिराज न्याती ने 10 में से 5 अंक दिए, उनका कहना है कि कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रखा गया विशेष बजटीय प्रस्ताव स्वागत योग्य है। छोटे निवेशकों को भी प्रोत्साहित किया गया। औद्योगिक विकास व रोजगार पर ध्यान दिया है। आमूलचूल बदलाव नहीं है। ग्रामीण विकास व कृषि पर विशेष बजट का प्रावधान रखना सराहनीय पहल है।
बेहतर वित्तीय प्रबंधन
सीए एस.डी. जाजू ने 10 में से 7 अंक दिए, उनका कहना है कि जिन परिस्थितियों में वित्त मंत्री ने बजट पेश किया, वह बेहतर वित्तीय प्रबंधन कहा जा सकता है। कृषि पर विशेष ध्यान दिया है। जीएसटी के कारण कर ढांचे में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ। स्वास्थ्य बीमा, वरिष्ठ नागरिकों के निवेश पर कर में राहत देना सराहनीय है।
रोजगार बढ़ेगा
सीएमडी भाटिया एंड कम्पनी राम भाटिया ने 10 में से 7 अंक दिए, उनका कहना है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर का बजट में कोई जिक्र नहीं। सभी सेक्टरों के नए कर्मचारियों को वेतन का 12 प्रतिशत तक सरकार से ईपीएफ अगले तीन तक तक मिलेगा यह कदम सराहनीय है। मुद्रा योजना में ऋण दायरा बढ़ाने से रोजगार बढ़ेगा। आर्थिक मजबूती दर्शायी गई है।
किसानों का ध्यान
किसान नेता जगदीश शर्मा ने 10 में से 8 अंक दिए, उनका कहना है कि बजट में खेत और किसान का विशेष ध्यान है। ग्रामीण क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग इकाइयां लगाने को प्रोत्साहित किया गया है। सिंचाई के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया गया।
सभी को राहत
अध्यक्ष जनरल मर्चेन्ट्स एसो. राकेश जैन ने 10 में से 9 अंक दिए, उनका कहना है कि पहली बार स्वास्थ्य बीमा योजना से प्रत्येक परिवार को कवर करने का प्रयास किया गया। शिक्षा ढांचे के मजबूती की प्रतिबद्धता दिखाई। आयकर छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए थी।
लघु उद्योगों की अनदेखी
सचिव एसएसआई एसो. राजकुमार जैन ने 10 में से 6 अंक दिए, उनका कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद लघु उद्योगों को बजट में राहत की उम्मीद थी, लेकिन अनदेखी हुई। उद्योग नहीं लगेंगे तो रोजगार कैसे बढ़ेगा।
ग्रामीणों पर जोर
सीए मिलिंद विजयवर्गीय ने 10 में से 7 अंक दिए, उनका कहना है कि कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर जोर है। रबी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना किया गया। 250 करोड़ तक टर्नओवर वाली कम्पनियों को राहत देने का प्रयास सराहनीय है।
विकास को समर्पित
अध्यक्ष रोटरी पद्मिनी क्लब पीयूषा न्याती ने 10 में से 7 अंक दिए, उनका कहना है कि ज्वैलरी और टैक्सटाइल उद्योगों को बढ़ावा दिया गया। आयात शुल्क बढ़ाने से मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी। उद्योगों को बढ़ावा देने, पानी-बिजली, रेल, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर है। विकास को समर्पित बजट है।
जनकल्याकारी बजट
अध्यक्ष लघु उद्योग भारती महिला इकाई श्वेता जैन ने 10 में से 7 अंक दिए, उनका कहना है कि रोटी, कपड़ा और मकान इन तीन बिन्दुओं को बजट समर्पित है। किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने, कपड़ा उद्योगों को बढ़ाने देने पर जोर है। मेगा फूड पार्क घोषित किए गए हैं, इसमें से एक कोटा में स्थापित हो। जनकल्याकारी बजट है।
खाद्य प्रसंस्करण पर जोर
अध्यक्ष कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट्स एसोसिएशन अविनाश राठी ने 10 में से 8 अंक दिए, उनका कहना है कि 1400 करोड़ का बजट खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए दिया जाना अच्छी बात है। 42 मेगा फूड पार्क खोलने, प्रत्येक ग्राम पंचायत को इंटरनेट सेवा से जोडऩा अच्छी घोषणा है। ई-ऑक्शन के व्यावहारिक पहलू भी देखे जाने चाहिएं।
बजट में कुछ भी नहीं
वरिष्ठ एडवोकेट मुकेश गुप्ता ने 10 में से 1 अंक दिया, उनका कहना है कि लॉन्ग टर्म केपिटेल गेन्स पर दस प्रतिशत टैक्स लगा दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य पर एक फीसदी सेस बढ़ाना उचित नहीं। कर विसंगितयों पर ध्यान नहीं दिया। 56 एयरपोर्ट को हवाई सेवा से जोडऩे की घोषणा सराहनीय है।
बेरोजगारों की उपेक्षा
अध्यक्ष दि एसएसआई एसोसिएशन प्रेम जे. भाटिया ने 10 में से 4 अंक दिए, उनका कहना है कि सामान्य बजट है। रोजगार को बढ़ावा देने की कोई बात नहीं कही। रोजगार नहीं बढ़ेगा तो विकास नहीं होगा। लघु उद्योगों को कोई राहत नहीं है।
सन्तुलित बजट
वरिष्ठ कर सलाहकार एम.एल. पाटौदी ने 10 में से 9 अंक दिए, उनका कहना है कि सन्तुुलित बजट है। वरिष्ठ नागरिकों को कर में बड़ी राहत दी है। रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर है। ग्रामीण विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए।
निराशाजनक है
अचल पोद्दार उद्यमी ने 10 में से 0 अंक दिए, उनका कहना है कि एमएसएमई सेक्टर पर कोई ध्यान नहीं जबकि रोजगार सृजन का यह सबसे बड़ा सेक्टर है। लघु, मध्यम व सूक्ष्य इकाइयों को ब्याज में छूट देनी चाहिए। निराशाजनक बजट है।
सशक्तीकरण पर जोर
अध्यक्ष जेसीई सुरभि क्लब मिनल वसल ने 10 में से 7 अंक दिए, उनका कहना है किउज्ज्वला योजना में ग्रामीण महिलाओं को नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन, नौकरी पेशा महिलाओं का पीएफ अंशदान बढ़ाने का निर्णय स्वागत योग्य है। शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया है।