Crime News: मामले में संबंधित सीआइ सुरेंद्र सिंह बिश्नोई और कांस्टेबल महावीर कुमार को दोषी मानते हुए 26 मार्च को लाइन हाजिर कर दिया गया था। पूरी जांच रिपोर्ट मंगलवार को जयपुर पीएचक्यू भेज दी गई है।
Kota Police CI And Constable Line Hazir: कोटा ग्रामीण के एक थाना क्षेत्र में नाबालिग के गर्भपात से जुड़े डेढ़ साल पुराने मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। कोटा ग्रामीण एसपी की ओर से करवाई गई जांच में सामने आया कि आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय संबंधित थाने के पुलिसकर्मियों ने उससे लाखों रुपए की वसूली की।
मामले में संबंधित सीआइ सुरेंद्र सिंह बिश्नोई और कांस्टेबल महावीर कुमार को दोषी मानते हुए 26 मार्च को लाइन हाजिर कर दिया गया था। पूरी जांच रिपोर्ट मंगलवार को जयपुर पीएचक्यू भेज दी गई है। राजस्थान पत्रिका ने सबसे पहले 2 अप्रेल के अंक में इस पूरे मामले को उजागर किया था।
जुलाई 2024 में एक युवक किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार किया। किशोरी के न्यायालय में दर्ज बयान में जबरन गर्भपात की बात सामने आने के बाद जांच आगे बढ़ाई गई।
जांच में खुलासा हुआ कि मध्यप्रदेश के सीहोर स्थित मां नर्मदा हॉस्पिटल में गर्भपात कराया गया था। पुलिस टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की तो रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी सामने आई। अस्पताल संचालक ने पीड़िता के नाम और उम्र में हेरफेर कर दस्तावेज तैयार किए थे। इसके बाद अस्पताल संचालक ज्ञानसिंह मेवाड़ा और एक अन्य चिकित्सक के खिलाफ अवैध गर्भपात का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अस्पताल संचालक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि एक अन्य डॉक्टर फरार हो गया था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 2 मार्च को पुलिसकर्मी डॉक्टर को पूछताछ के लिए कोटा लेकर आए थे। थाने में पूछताछ के बाद कांस्टेबल महावीर ने डॉक्टर को अलग ले जाकर मामला रफा-दफा करने के लिए 8 लाख रुपए की मांग की। साथ ही डॉक्टर को धमकाया गया कि पैसे नहीं देने पर उसका लाइसेंस निरस्त कर जेल भिजवा दिया जाएगा।
डॉक्टर ने 7 लाख रुपए देने की सहमति जताई और अपने परिचितों से 6.50 लाख रुपए जुटाए। इसके बाद उसे कार से एक होटल ले जाया गया, जहां यह राशि पुलिसकर्मी को दी गई। 8 मार्च को फिर थाने के स्वागत कक्ष में 50 हजार रुपए और दिए गए।
पैसे देने के बाद ही डॉक्टर को जाने दिया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डॉक्टर को दो बार थाने बुलाया गया, लेकिन अवैध गर्भपात जैसे गंभीर मामले में भी उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। उसने गर्भपात से पहले आवश्यक दस्तावेज भी नहीं लिए थे, फिर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए 26 मार्च को ही सीआइ को लाइन हाजिर कर दिया था। जांच में संबंधित पुलिसकर्मियों द्वारा डॉक्टर से पैसे लेने की पुष्टि हुई है। जिसकी पूरी रिपोर्ट जयपुर पीएचक्यू भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई मुख्यालय स्तर पर की जाएगी। डॉक्टर का लाइसेंस निरस्त करने के लिए संबंधित विभाग को पुलिस की ओर से पत्र लिखा जाएगा।
सुजीत शंकर, कोटा ग्रामीण एसपी