कोटा

5 साल पुराने मामले में 57.70 लाख रूपए की क्षतिपूर्ति के आदेश

कार हादसे में डॉक्टर की मौत के मामले में क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए, क्षतिग्रस्त भवन में नहीं बैठाएं बच्चे , कांग्रेस ने किया फैसले का स्वागत
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Updated: 20 Jan 2018, 12:35 PM IST
Court News

करीब पांच साल पहले बूंदी में कार हादसे में डॉक्टर की मौत के मामले में मोटर वाहन दुर्घटना दावा क्रम एक अदालत ने शुक्रवार को 57 लाख 70 हजार 375 रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए हैं। न्यू आकाशवाणी कॉलोनी निवासी मैमूना पत्नी डॉक्टर अशफाक हुसैन कुरैशी ने बूंदी निवासी कार मालिक हरीश अजवानी, कार चालक शिव कॉलोनी बूंदी निवासी देवलाल प्रजापत और नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी बूंदी के शाखा प्रबंधक के खिलाफ 24 अगस्त 201& को अदालत में परिवाद पेश किया था। इसमें कहा था कि उसके पति डॉक्टर अशफाक हुसैन बूंदी राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सक थे। वे 18 नवम्बर 2012 को बूंदी में ही खोजा रोड स्थित घर के बाहर खड़े थे। तभी एक कार तेज गति से आई और उन्हें टक्कर मारते हुए काफी दूर तक घसीटकर ले गई। इससे उनके शरीर में काफी चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में बूंदी कोतवाली में मामला दर्ज कराया था। एमएसीटी क्रम एक अदालत ने विपक्षीगण को आदेश दिया कि वे परिवादी को 57 लाख 70 हजार &75 रुपए क्षतिपूर्ति राशि के रूप में अदा करें।


क्षतिग्रस्त भवन में नहीं बैठाएं बच्चे
कोटा. स्थायी लोक अदालत ने गुरुवार को अधिकारियों को आदेश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि नांता स्थित ऐतिहासिक महल का जो भवन क्षतिग्रस्त है, उसमें विद्यार्थियों को नहीं बैठाएं। साथ ही, जिन कमरों की छतें ठीक नहीं हैं, उनमें भी बिना मरम्मत कराए बच्चों को नहीं बैठाया जाए। अदालत ने यह आदेश एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी की ओर से पेश जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए दिए। सैनी ने जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक व माध्यमिक, राजकीय मा. विद्यालय और राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय नांता के प्रधानाध्यापकों, न्यास सचिव, जिला कलक्टर व सर्व शिक्षा अभियान के एडीपीसी के खिलाफ 2017 में याचिका पेश की थी। इसमें कहा था कि नांता स्थित ऐतिहासिक महक के खंडहर भवन में दो सरकारी स्कूल संचालित हैं। उनमें कई विद्यार्थी पढऩे आ रहे हैं। स्कूल भवन का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त है। कई कमरों की छतें बरसात में टपकती हैं। भवन की मरम्मत नहीं करवाई जा रही है। याचिका में कहा कि स्कूल के क्षतिग्रस्त भवन की मरम्मत करवाई जाए। साथ ही, विद्यार्थियों को हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें अन्यत्र शिफ्ट किया जाए। एडवोकेट सैनी ने बताया कि अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि क्षतिग्रस्त भवन में बच्चों को नहीं बैठाया जाए। साथ ही, स्कूल संचालन के नए भवन के लिए वे अपने स्तर पर राज्य सरकार से पत्र व्यवहार करें।

कोर्ट के फैसले का स्वागत
कोटा. भाजपा सरकार द्वारा राजीव गांधी सेवा केन्द्र का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र किए जाने के फैसले को राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा रद्द करने का कांग्रेस ने स्वागत किया है। कोटा देहात जिला कांग्रेस सेवादल के जिला अध्यक्ष मनोज दुबे ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने जनसुविधा के लिए राजीव गांधी सेवा केन्द्रों की शुरूआत की थी। सभी जिला मुख्यालयों पर जन सुविधा केन्द्र और पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों पर राजीव गांधी सेवा केन्द्र भवनों का निर्माण करवाया था। लेकिन राजस्थान की बीजेपी सरकार ने 28 दिसम्बर 2014 को अधिसूचना जारी राजीव गांधी सेवा केन्द्र का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र कर दिया था। इस पर लाखों रुपए खर्च भी किए गए।

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