मेडिकल कॉलेज में यह किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। प्राचार्या डॉ. संगीता सक्सेना ने बताया कि झालावाड़ निवासी सानिया बी पिछले आठ-दस साल से किडनी की बीमारी से परेशान थी।
पति-पत्नी का संबंध खून के रिश्तों से बढ़कर होता है। यह बात सच करते हुए पति ने पत्नी की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान कर दी। मेडिकल कॉलेज में यह किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। प्राचार्या डॉ. संगीता सक्सेना ने बताया कि झालावाड़ निवासी सानिया बी पिछले आठ-दस साल से किडनी की बीमारी से परेशान थी। कोटा मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग में दिखाया। यहां जांच परीक्षण के बाद 11 दिन पहले पति इमरोजुल्लाह ने पत्नी को किडनी दान की। इमरोज आर्किटेक्ट है। उसकी 12 साल पहले शादी हुई थी और उसके दो बच्चे हैं। यूरोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. निलेश जैन ने बताया कि सर्जरी 4 घंटे चली। नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खण्डेलिया ने बताया कि ऑपरेशन के बाद किडनी की जांचों में भी निरंतर सुधार आने के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। गौरतलब है कि कोटा मेडिकल कॉलेज में अब तक 13 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।
ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग से डॉ एससी दुलारा, डॉ. सीएल खेड़िया, यूरोलॉजी से डॉ. शैलेंद्र गोयल, डॉ. अंकुर झंवर का सहयोग रहा। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सभी आवश्यक सर्जिकल आइटम्स व दवाइयों की निःशुल्क व्यवस्था मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के अन्तर्गत की गई।