कोटा

मौसम ने दिखाए तेवर तो किसानो ने बदले रास्ते

मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते हाड़ौती के किसानों का इस साल परम्परागत खेती के बजाय दलहन, मसाला की ओर रुझान है।

2 min read
Jan 05, 2018

मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते हाड़ौती के किसानों का इस साल परम्परागत खेती के बजाय दलहन, मसाला की ओर रुझान है। अब तक हाड़ौती में खाद्यान्न की लक्ष्य के मुताबिक बुवाई भी नहीं हो पाई है। वहीं दलहन, मसाला जिंसों की बुवाई का रकबा लक्ष्य से तीन गुना तक ज्यादा हो गया।

ये भी पढ़ें

अकड़ के बैठने वाले लोग भी सिकुड़ कर बैठ रहे हैं !

रहा मौसम प्रतिकूल

इस साल जून से दिसम्बर तक हाड़ौती में मौसम प्रतिकूल रहा। मानसून देर से सक्रिय हुआ। बारिश भी कम हुई। कई उच्च जलाशय, बांध लबालब नहीं हो सके। भूगर्भीय जलस्तर भी ज्यादा उपर नहीं उठ सका। दिसम्बर के मध्य तक भी सुबह-शाम ही सर्दी का असर है। गर्मी के चलते इस साल बुवाई भी करीब 10-15 दिन देरी से शुरू हो पाई।

जोखिम भरा डेढ़ माह

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि हाड़ौती में कृषि के लिए डेढ़ माह जोखिम भरा है। जनवरी व 15 फरवरी तक हाड़ौती में मौसम परिवर्तन का दौर रहता है। इस दौरान कभी कड़ाके की सर्दी पड़ती है तो कभी बादल छाते हैं। मावठ भी गिरती है। फरवरी के प्रथम-द्वितीय सप्ताह में सर्दी का असर कम होने लगता है। तापमान बढऩे लग जाता है। ऐसे में फसलों में कीट प्रकोप की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।

गेहूं-सरसों में फिसड्डी, चना-लहसुन पर जोर

हाड़ौती में इस साल गेहूं-सरसों, मसूर, तारामीरा मैथी की बुवाई का लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ। इधर, चना, धनिया अली, लहसुन, जौ की बुवाई लक्ष्य से अधिक हो चुकी है। चना, लहसुन, धनिया की बुवाई तो लक्ष्य से कई गुना अधिक हो चुकी है।

कृषि खंड कोटा के संयुक्त निदेशक पीके गुप्ता का कहना है कि मानसून कमजोर रहने के चलते बुवाई करीब दस दिन देरी से शुरू हुई। अगेती बुवाई वाले खेतों की फसलें यौवन पर हैं। मौसम अब हर दिन बदल सकता है। किसान सावचेत रहें, फसल पर निगाह रखें। कीट प्रकोप से बचने के लिए हल्की सिंचाई करें। शाम को खेत की मेड़ पर धुआं कर दें। रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़ कर जमीन में गाड़ दें। तत्काल कृषि पर्यवेक्षक से सलाह लें।

ये भी पढ़ें

अंजलि शर्मा ने अंजी नाटक के मंचन में दर्शकों के दिलों पर छोड़ी छाप…देखिए तस्वीरें
Published on:
05 Jan 2018 02:37 pm
Also Read
View All