Gold Jewelry Industry Impact: सोने की खरीद को लेकर प्रधानमंत्री की एक साल तक संयम बरतने की अपील के बाद बाजार और ज्वैलरी उद्योग में चर्चा तेज हो गई है। कोटा समेत देशभर के ज्वैलर्स का मानना है कि इससे शादी-ब्याह और त्योहारी मांग पर असर पड़ सकता है।
Kota Gold Jewelers On PM Modi Appeal: प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद कोटा समेत देशभर में नई बहस छिड़ गई है। सोने के आभूषण महिलाओं की पहली पसंद माने जाते हैं। शादी समारोहों के अलावा जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ और अन्य सामाजिक आयोजनों में भी रिश्तेदार शगुन के तौर पर सोने के आभूषण उपहार में देते हैं। सोने-चांदी के दाम सातवें आसमान पर पहुंचने के बावजूद महिलाओं ने इसकी खरीदारी जारी रखी है।
कोटा शहर की महिलाओं में सोना नहीं खरीदने की अपील को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। हालांकि अधिकांश महिलाओं का कहना है कि बेटे-बेटियों की शादी और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए सोने के आभूषण खरीदना जरूरी हो जाता है। गुमानपुरा निवासी रमेश शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी की अगले माह शादी है। अधिकांश आभूषण पहले ही खरीदे जा चुके हैं, जबकि कुछ अन्य आभूषण अभी और खरीदने हैं।
सोने की खरीद केवल निवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ी हुई है। शादी-ब्याह और त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। यही कारण है कि देश में हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ता है।
कोटा जिले में ज्वैलरी कारोबार से करीब 10 हजार परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। जिले में लगभग दो हजार ज्वैलरी दुकानें और शोरूम संचालित हैं। इसके अलावा करीब पांच हजार कारीगर सोने-चांदी के आभूषण बनाने के कार्य से जुड़े हैं। ऐसे में सोना नहीं खरीदने की अपील का सीधा असर ज्वैलर्स, कारीगरों और सुनारों पर पड़ सकता है।
सोना नहीं खरीदने की अपील से ज्वैलरी और बुलियन इकोसिस्टम से जुड़े देशभर के लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। बाजार में नकारात्मक माहौल बनने से ग्राहकों की आवाजाही, शादी-त्योहारी मांग और मैन्युफैक्चरिंग ऑर्डर घट सकते हैं।
सुरेन्द्र गोयल विचित्र, अध्यक्ष, श्री सर्राफा बोर्ड
इससे सोने की खरीद कम हो सकती है, जिससे छोटे और मध्यम ज्वैलर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। शादी-ब्याह और त्योहारों की खरीदारी प्रभावित होने से व्यापार और कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह केवल एक अपील है, कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं।
ओम जैन, महासचिव, ज्वैलर्स एसोसिएशन कोटा