
Kota CBEO Snehlata Sharma Inspirational Story: कोई दृढ़ निश्चय कर मेहनत व लगन से मंजिल की ओर बढ़ जाए तो फिर मुश्किलों के बादल अपने-आप छंटने लगते हैं। ऐसी ही मिसाल है महावीर नगर विस्तार योजना क्षेत्र निवासी स्नेह लता शर्मा। उन्हें बचपन में अभिनय व कला से ऐसा स्नेह हुआ कि मंच पर अभिनय की लता फलती फूलती चली गई।
वर्तमान में स्नेहलता मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, शहर के पद पर कार्यरत है। अभी भी जब अवसर मिलता है तो मंच पर भीतर छिपा हुआ कलाकार जागृत हो उठता है।
शिक्षा नगरी के साथ वे प्रदेश के विभिन्न मंचों पर अपनी अभिनय कला की छाप छोड़ चुकी हैं। स्नेह लता बताती हैं कि 80 के दशक में महिलाओं, लडकियों के अभिनय कला, मंच आदि क्षेत्र थोड़े मुश्किल भरे होते थे। उनके सामने भी कुछ बंदिशे थी, लेकिन दृढ़ता से चुनौतियों का सामना कर मंचों पर रंग जमाने लगी। वह बताती है कि फिल्म व मंच दोनों की अपनी विशेषता है, लेकिन जिसने मंच से दर्शकों के दिल पर राज कर लिया, उसके लिए चमक- दमक मायने नहीं रखती।
स्नेहलता शर्मा बताती है कि अभिनय, लेखन का शौक शुरू से ही रहा, लेकिन कॉलेज में आई तो उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। नाटक का नाम ठीक से याद नहीं लेकिन 1986 में जेडीबी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हरिशंकर परसाई की कहानी भोला राम का जीव बहुत अच्छी लगी तो उसका नाट्य रूपातंरण कर मंचित किया।
अभिनय के लिए स्नेह लता को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। हौंसला बढ़ा तो राजस्थान संगीत नाटक अकादमी से भी सीनियर आर्टिस्ट के साथ कार्य किया। सार्वजनिक मंच पर 1991-92 में अभिनय का अवसर मिला।सूचना केन्द्र में समाज सेवी तबले नाटक में अभिनय किया। इस नाटक से काफी सराहना मिली। इसके बाद बकरी, एक था गधा, एक और द्रोणाचार्य, आधे अधूरे, सदाचार का ताबीज तथा बाल श्रम व शिक्षा पर आधारित कई नाटकों में अभिनय किया।
निर्देशन के रूप में भी भूमिका निभाई। कोटा में आईएल ऑडिटोरियम, जयपुर में जवाहर कला केन्द्र, रविन्द्र मंच, उदयपुर के लोक कला मंडल समेत अन्य मंचों पर प्रस्तुति दी। हाड़ौती की गाथा, सलाम ए हिंद जैसे डॉक्यूमेंट्री भी बनाई। सभी में सराहना मिली। आकाशवाणी के लिए भी कार्य किया। हाल ही में जलन से जलतरंग नाटक का निर्देशन किया। सीमा कपूर के निर्देशन में एकलव्य नाटक में भी भूमिका निभाई।
स्नेह लता बताती है कि 80-90 के दशक में महिला कलाकार मिलती नहीं थी। परिजन बेटियों को अभिनय के क्षेत्र में भेजते नहीं थे। आज दौर बदल गया है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। सोशल मीडिया का जमाना है। खुद पैरेंट्स बेटियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह अच्छा संकेत है।
स्नेह लता बताती है कि थियेटर सुकून देने वाला है, लेकिन एक कमी देखी जा रही है, चाहे महिला हो या पुरुष जल्द चमकने की कोशिश में रहते हैं।
फिल्म, धारावाहिकों का ग्लैमर मंच से दूर कर माया नगरी की ओर जाने के लिए प्रेरित करता है, इन सब के बावजूद दोनों का अपना महत्व है। मंच पर जो आपने दर्शकों के सामने जो प्रस्तुत किया वही वास्तविक होता है, कैमरे के सामने कुछ कमी छोड़ दी तो री-टेक हो सकता है। मेहनत हर जगह जरूरी है।