कोटा

गुर्जर आंदोलन: अब आरक्षण का अखाड़ा बना हाइवे, बन्नाठी घुमा रहे गुर्जर, Video में देखिए करतब

गुर्जरों का महापड़ाव नेशनल हाइवे पर चौथे दिन भी जारी रहा। गाने-बजाने से लेकर खाने तक सब कुछ हाइवे पर चल रहा है। अब गुर्जर समाज के लोगों ने अखाड़ा खेलना शुरू कर दिया।

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Feb 14, 2019
गुर्जर आंदोलन: अब आरक्षण का अखाड़ा बना हाइवे, बन्नाठी घूमा रहे गुर्जर

नैनवां. पांच फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर चौथे दिन बुधवार को भी टोपा गांव के पास गुलाबपुरा-उनियारा हाई-वे को पड़ाव डालकर जाम किए रखा। गुर्जरों के साथ एसबीसी में शामिल बंजारा समाज भी बुधवार को पड़ाव में शामिल हो गया। जिनके खाने की व्यवस्था भी जाम स्थल पर ही थी। दोनों समाज के जमा लोगों ने सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया। बाद में अखाड़ेबाजी की। प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल रही। प्रदर्शन के बाद हाइवे पर ही अखाड़े का आयोजन किया जिसमें दोनों ही समाजों के अखाड़ेबाजों ने लाठियां घुमाने का प्रदर्शन किया। सत्संग भी किया। पड़ाव स्थल पर प्रतिदिन अलग-अलग गांवों की ओर से खाने की व्यवस्था की जा रही है।

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सुबह से ही आने लग जाते
चौथे दिन भी पड़ाव में शामिल होने के लिए दोनों ही समाज के लोग सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए। पड़ाव में गुर्जर आरक्षण समिति के जिला संयोजक राधाकृष्ण पोसवाल, नैनवां तहसील अध्यक्ष हीरालाल रैणा, सचिव रामहोशियर बागड़ी, गुर्जर उत्थान समिति के अध्यक्ष श्योजीलाल चैंची, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मियाराम फौजी, श्योकरण फौजी, भैरूलाला टोपा, कल्याण धांगड़, गंगाराम रैणा, देवलाल गुर्जर, शिवराज खोड़वा, रमेश दियाली, भैरूलाल चाड़, विनोद नेटड़ा, बामनगांव के पूर्व सरपंच सूरजमल भाटी के साथ नैनवां तहसील के एक दर्जन से अधिक गांव सहित हिण्डोली व उनियारा तहसील के गांवों से भी लोग शामिल रहे।

पुलिस बनी सैलानियों के लिए गाइड
हाइवे जाम रहने से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग की जानकारी देने के लिए स्थापित पुलिस चौकियों पर पुलिसकर्मी गाइड बने रहे। दोपहर को विदेशी सैलानियों के वाहन भी जाम में फंस गए। लंदन से आए सैलानियों को बूंदी जाना था। वे एनएच 148 डी पर सवाईमाधोपुर की ओर से आ रहे थे। कीरों का झोपड़ा तिराहे पर तैनात पुलिस कर्मी उनके लिए मार्ग गाइड बने और उनको बाछोला मोड़ से होकर बूंदी की ओर जाने मार्ग पर निकाला।

इन गांवों से आया बंजारा समाज
आंदोलन के समर्थन में बंजारा समाज भी महापड़ाव में शामिल हो गया। समाज के हम्मीरसिंह, गोकुलचंद, जगदीश, भोजराज, लेखराज, राधेश्याम, दौलतराम, गजानन्द, राजूलाल, मोहरसिंह के साथ एक दर्जन गांवों के लोग पड़ाव में पहुंचे।

Updated on:
14 Feb 2019 06:35 pm
Published on:
14 Feb 2019 08:30 am
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