कोटा. संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस व जेके लोन के सिस्टम 'जुगाड़ व भगवान' भरोसे चल रहे हैं। वैकल्पिक तौर पर कोई व्यवस्था भी नहीं है।
कोटा. संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस व जेके लोन के सिस्टम 'जुगाड़ व भगवान' भरोसे चल रहे हैं। यहां सिस्टम फेल होने से सोनोग्राफी मशीनें कभी भी बंद हो सकती है। वैकल्पिक तौर पर कोई व्यवस्था भी नहीं है। इन अस्पतालों में वर्तमान में जुगाड़ से ही काम चल रहा है। इधर, मरीजों की लम्बी वेटिंग लिस्ट लग चुकी है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
ऐसे चल रहा जुगाड़ से काम
एमबीएस अस्पताल में सोनोग्राफी की दो मशीनें है। इनमें से एक पिछले दो माह से बंद पड़ी है। दूसरी मशीन में अलग-अलग क्रॉप लगते है, लेकिन एक ही से काम चलाया जा रहा है। उस क्रॉप को भी टेप बांधकर चलाया जा रहा है। उधर, जेके लोन अस्पताल में भी सोनोग्राफी मशीन का क्रॉप खराब हो गया जिसे एमबीएस की खराब मशीन का क्रॉप लगाकर चलाया जा रहा है।
बाजार में भी नहीं मिल रहे पार्ट्स
चिकित्सकों ने बताया कि इन मशीनों के पार्ट्स की तलाश उन्होंने स्थानीय बाजार में की थी, लेकिन यहां इनके पार्ट्स नहीं मिल रहे। कम्पनी ने इन मशीनों को बनाना ही बंद कर दिया है। इसी कारण यहां कार्यरत डॉ. नेमीचंद व डॉ. धर्मराज मीणा ने यहां कार्य करना बंद कर दिया है। वे अब सिर्फ स्टूडेंट्स को ही सीखा रहे हैं।
10 दिन बाद की दे रहे तिथि
एमबीएस व जेके लोन अस्पतालों में प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों की सोनोग्राफी होती है। इनमें से आईपीडी व इमरजेंसी के ही मरीजों की सोनोग्राफी की जाती है। आउटडोर मरीजों को 10 दिन बाद की तिथि दे रहे हैं। इन तिथियों में भी सोनोग्राफी हो जाए, इसकी गारंटी नहीं है।
सोनोग्राफी विभाग से डॉ. धर्मेन्द्र आसेरी का कहना है कि एमबीएस व जेके लोन अस्पतालों की सोनोग्राफी की मशीनें खराब हो चुकी है। इनको जुगाड़ से ही चलाया जा रहा है। इस कारण मरीजों की सोनोग्राफी समय पर नहीं हो पा रही है। नई मशीनों के लिए अधीक्षक व प्रिंसिपल को लिख चुके हैं।
एमबीएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीके तिवारी का कहना है कि सोनोग्राफी मशीनों को कंडम घोषित किया जा चुका है। नई मशीनों के लिए प्रिंसिपल को डिमांड भेज रखी है। बजट आने पर नई मशीनें खरीदी जाएगी।