नगर निगम की ओर से शहर में कई इलाकों में रैन-बसेरे तो बना दिए, लेकिन कड़ाके की सर्दी में भी उनके ताले नहीं खुल रहे हैं।
नगर निगम की ओर से शहर में कई इलाकों में रैन-बसेरे तो बना दिए, लेकिन कड़ाके की सर्दी में भी उनके ताले नहीं खुल रहे हैं। मजबूरन लोगों को खुले आसमान तले रात गुजारनी पड़ रही है। कोई विकल्प उनके पास नहीं दिख रहा। कई तो सड़कों पर ही रात बिता रहे है। 'राजस्थान पत्रिका' संवाददाता ने मंगलवार देर रात को नए कोटा में दो रैन-बसेरों के हाल देखे तो इन पर ताले लगे मिले।
अभी तक बंद हैं दरवाजे
डीसीएम रोड पर फ्लाईओवर के नीचे नगर निगम की ओर से रैन-बसेरा बनाया गया है, लेकिन उसके भी ताले ही लटके हैं। इसके चलते जरूरतमंदों को ठहरने व रात बिताने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। वे खुली हवा व जाडे की सर्दी में ठिठुरने को मजबूर हैं। इस रैन-बसेरे में सुविधाघर भी बेहाल हैं। इनके दरवाजे टूटे पड़े हैं, गंदगी से अटे पड़े हैं।
सेवन वंडर्स के पास बने रैन बसेरे में नहीं सुविधा
नगर निगम की ओर से सेवन वंडर्स के पास किशोर सागर तालाब के किनारे बनाए गए अस्थाई रैन बसेरे में पर्याप्त सुविधा नहीं है। लोगों को न तो ओढऩे के लिए पर्याप्त रजाई है और नहीं बिछाने के लिए गद्दे। ऐसे में लोगों को सर्दी में काफी परेशानी हो रही है।
गत दिनों राज्य सरकार की ओर से प्रदेश की सभी निकाय संस्थाओं को अपने-अपने क्षेत्र में रैन बसेरों पर पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। होटल व सार्वजनिक स्थलों पर अस्थाई रैन बसेरा बनाकर लोगों को राहत देने के लिए निर्देशित किया गया था। लेकिन शहर के कई स्थानों पर बने रैन बसेरों का यही हाल है। कहीं ताले लगे हुए हैं तो कहीं सुविधा तक नहीं मिलती।