कोटा

Kota Dussehra Mela: 14 मिनट में दशानन का कुनबा हुआ खाक, दशहरा मेले में जापान, चीन और ब्रिटेन के पर्यटक भी पहुंचे

राजस्थान में मंगलवार को दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में 105 फीट ऊंचे रावण सहित मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का 14 मिनट में दहन हुआ। इससे पहले गढ़ पैलेस से भगवान लक्ष्मीनारायणजी की शाही सवारी निकली। जापान, चीन और ब्रिटेन से आए पर्यटक भी इस ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बने।
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Oct 20, 2026
Kota Dussehra
Kota Dussehra Mela: 105 फीट का रावण (फोटो-पत्रिका)

कोटा। प्रदेशभर में मंगलवार को विजयादशमी का पर्व धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। जगह-जगह रावण दहन के आयोजन हुए और लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया। कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में भी दशहरा मैदान हजारों लोगों की मौजूदगी का गवाह बना। यहां पटाखों की गूंज और रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया गया। 105 फीट ऊंचे रावण सहित तीनों पुतले महज 14 मिनट में जलकर खाक हो गए। ऐतिहासिक आयोजन में जापान, चीन और ब्रिटेन से आए पर्यटक भी शामिल हुए।

दशहरा मेले में रावण दहन से पहले हाड़ौती की रियासतकालीन परंपराओं का वैभव देखने को मिला। गढ़ पैलेस में पारंपरिक दरीखाना सजा और विजयादशमी की रस्में निभाई गईं। इसके बाद भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी शाही लवाजमे के साथ दशहरा मैदान के लिए रवाना हुई। शुभ मुहूर्त में शाम 6.31 बजे निकली शोभायात्रा को देखने के लिए रास्ते के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे।

शोभायात्रा में शामिल राम लक्ष्मण की झांकी व रावण दहन। फोटो-पत्रिका

शाही लवाजमे के साथ निकली भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी

विजयादशमी पर गढ़ पैलेस में आयोजित पारंपरिक दरीखाने में हाड़ौती क्षेत्र के पूर्व ठिकानों के प्रतिनिधि राजसी वेशभूषा में शामिल हुए। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ रामा-श्यामी की परंपरा निभाई गई। महापौर अनुसुइया गोस्वामी, उप महापौर विवेक राजवंशी सहित कई गणमान्य नागरिकों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए विदेश से आए पर्यटक भी पहुंचे।

वानर सेना और राक्षस सेना के बीच हुआ युद्ध

भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी हाथी पर निकाली गई। पूर्व राजपरिवार के सदस्य इज्यराज सिंह खुली जीप में सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुए। पूर्व राजपरिवार के सदस्य जयदेव और विभिन्न ठिकानों के प्रतिनिधि भी साथ रहे। शोभायात्रा में रामायण के प्रसंगों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान, सुग्रीव, अंगद, विभीषण, नल-नील और जामवंत के पात्रों के साथ रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पात्र भी शामिल हुए। वानर सेना और राक्षस सेना के बीच युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

विदेशी पर्यटकों संग दरीखाने में कुछ यूं ​खिला​खिलाती नजर आईं महापौर अनुसुइया गोस्वामी। फोटो-पत्रिका

पहले मेघनाद, फिर कुंभकर्ण और अंत में रावण का दहन

शोभायात्रा के दशहरा मैदान पहुंचने पर पूर्व राजपरिवार के सदस्य इज्यराज सिंह ने पूजा-अर्चना कर रावण दहन की रस्म पूरी की। इसके बाद सबसे पहले मेघनाद, फिर कुंभकर्ण और अंत में 105 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। पुतलों में आग लगते ही पटाखों की तेज आवाज गूंज उठी और आसमान रंगीन आतिशबाजी से जगमगा गया। मैदान में मौजूद लोगों ने जयकारे लगाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला थे।

हाथी पर सवार होकर निकली भगवान लक्ष्मीनाथ की सवारी।

लोकनृत्यों ने बिखेरे देशभर की संस्कृति के रंग

शोभायात्रा में विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक विविधता का परिचय दिया। राजस्थान के कच्ची घोड़ी और कजरी नृत्य के साथ उदयपुर क्षेत्र की भील और सहरिया जनजातियों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। अरुणाचल प्रदेश के टप्पू युद्ध नृत्य, पश्चिम बंगाल के छाऊ नृत्य और केरल के कुम्माटी लोकनृत्य ने आयोजन को देशव्यापी सांस्कृतिक रंग दिया। आर्मी बैंड और पुलिस बैंड की धुनों के साथ महिलाओं के मंगल गीतों ने शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाई।

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Updated on:
20 Oct 2026 10:58 pm
Published on:
20 Oct 2026 10:46 pm