
दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर स्थित कोटा के पास गुड़ला स्टेशन से अचानक एक बड़ी खबर सामने आई, जिससे यात्रियों और आम जनता के बीच भारी हड़कंप मच गया। सूचना मिली कि गुड़ला स्टेशन पर दो ट्रेन आपस में टकरा गई हैं, और इस भीषण हादसे में कई यात्रियों के गंभीर रूप से जख्मी होने की आशंका है। खबर मिलते ही कोटा से रेलवे के राहत और बचाव दल तत्काल मौके के लिए रवाना हो गए और युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। डिब्बों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों के बीच चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अगर आप भी इस खबर को पढ़कर सहम गए हैं, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह घटना वास्तविक नहीं थी, बल्कि भारतीय रेलवे द्वारा आपात स्थिति से निपटने की अपनी तैयारियों को परखने के लिए किया गया एक नियोजित अभ्यास यानी 'मॉक ड्रिल' था।
रेलवे प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि ट्रेन संचालन के दौरान किसी भी अप्रत्याशित या गंभीर आपात स्थिति से निपटने के लिए रेलवे समय-समय पर इस तरह के सुरक्षा अभ्यास आयोजित करता है। इसी प्रक्रिया के तहत कोटा मंडल के गुड़ला स्टेशन पर दो ट्रेनों की टक्कर का एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया था।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि किसी वास्तविक हादसे की स्थिति में रेलवे के राहत दल, मेडिकल टीमें और सुरक्षाकर्मी कितनी जल्दी हरकत में आते हैं और कम से कम समय में बचाव कार्य कैसे शुरू किया जा सकता है।
अभ्यास के दौरान कोटा से पहुंचे रेस्क्यू दल ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत तेजी से काम करते हुए डिब्बों से 'घायलों' को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने का अभ्यास किया। मौके पर राहत-बचाव कार्य पूरी मुस्तैदी और युद्ध स्तर पर चलाया गया।
रेलवे अधिकारियों ने आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि इस तरह के मॉक ड्रिल को वास्तविक हादसा समझकर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अफवाहजनक खबरें साझा न करें। रेलवे की यह प्रक्रिया यात्रियों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने और किसी भी आपदा से निपटने के लिए कर्मचारियों को पूरी तरह तैयार रखने के लिए बेहद जरूरी होती है। गुड़ला स्टेशन पर हुआ यह पूरा घटनाक्रम महज एक सुरक्षा अभ्यास था, और सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।