
Rajasthan ongest high level bridge at banas river tonk
राजस्थान के बुनियादी ढांचे और सड़क विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। टोंक जिले के गहलोद गांव के पास बनास नदी पर प्रदेश के सबसे लंबे हाई-लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। लगभग 134.74 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भव्य और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के पूरा होने से उन हजारों ग्रामीण इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है, जिन्हें हर साल मानसून के मौसम में जलभराव और आवागमन बाधित होने की वजह से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) के वित्तीय सहयोग से बनाए गए इस पुल ने राज्य में सिविल इंजीनियरिंग और आपदा-रोधी निर्माण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।
भौगोलिक रूप से देखें तो यह पूरा इलाका हर साल बारिश के दिनों में मुख्यधारा से कट सा जाता था। बनास नदी में उफान आने पर पुराना रपटा या कॉजवे पूरी तरह पानी में डूब जाता था या क्षतिग्रस्त हो जाता था, जिससे टोंक, मालपुरा, पीपलू और अजमेर के बीच का संपर्क लंबे समय के लिए टूट जाता था। मजबूरी में स्थानीय लोगों और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 30 से 40 किलोमीटर का लंबा अतिरिक्त चक्कर काटकर सफर करना पड़ता था। लेकिन अब इस 3.34 किलोमीटर लंबे हाई-लेवल ब्रिज के शुरू हो जाने से इस पूरे क्षेत्र के लोगों को साल के 365 दिन सुरक्षित, सुगम और बारहमासी कनेक्टिविटी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट की संरचनात्मक और तकनीकी बारीकियों पर नजर डालें तो इसे बेहद उच्च मानकों के तहत तैयार किया गया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हाई-लेवल ब्रिज की कुल लंबाई 3.34 किलोमीटर (3,340 मीटर) है, जिसमें लगभग 2 किलोमीटर का मुख्य पुल और 1.34 किलोमीटर लंबी एप्रोच सड़कें शामिल हैं।
मजबूत स्पैन संरचना: इस मुख्य पुल में 40-40 मीटर की लंबाई वाले कुल 50 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्पैन बनाए गए हैं, जो इसे अत्यधिक मजबूत बनाते हैं।
भार वहन क्षमता: इस ब्रिज की लोड-बेयरिंग कैपेसिटी करीब 243 टन आंकी गई है, जो भारी मालवाहक वाहनों और कमर्शियल ट्रैफिक के आवागमन के लिए पूरी तरह मुफीद है।
सख्त लोड टेस्टिंग: पुल की मजबूती और गुणवत्ता की पुष्टि के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के तहत 5 चरणों में इसकी कड़ी लोड टेस्टिंग पूरी की गई। टेस्टिंग के दौरान इसमें 92 प्रतिशत की संरचनात्मक रिकवरी दर्ज की गई, जबकि 85 प्रतिशत या इससे अधिक रिकवरी को ही तकनीकी रूप से संतोषजनक माना जाता है।
इस नए हाई-लेवल ब्रिज के निर्माण से केवल टोंक जिला ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और कस्बों के बीच आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होंगी। इस पुल के शुरू होने से मुख्य रूप से पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह, फागी और अजमेर क्षेत्र के निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा। कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने, मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाने और विद्यार्थियों के दैनिक आवागमन में आने वाली बाधाएं अब पूरी तरह दूर हो जाएंगी। ग्रामीण अंचलों के लोगों का यह सफर अब न केवल समय बचाने वाला होगा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होगा।
Updated on:
03 Oct 2026 10:27 am
Published on:
03 Oct 2026 10:27 am
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