
Kota Murder Case : कोटा के चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस बहुचर्चित मामले में पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में ऐसे तथ्य सामने आए है, जिनसे चौकीदार और मठ से जुड़े संत की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस ने चौकीदार महावीर पारेता और संत नंदनवन को शनिवार रात गिरफ्तार कर लिया। इनसे गहन पूछताछ की जा रही है। वहीं जांच के दौरान पुलिस दो अन्य संभावित आरोपियों तक भी पहुंच चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में सामने आया है कि वारदात वाली रात मठ के चौकीदार महावीर पारेता ने आरोपियों से संपर्क किया था। आरोपियों को कथित रूप से यह जानकारी दी गई कि महंत देवानंद भोजन कर अपने कक्ष में सोने चले गए है। इसके कुछ समय बाद ही आरोपी मठ पहुंचे और सो रहे महंत पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर हत्या कर दी।
जांच में एक और चौकाने वाला खुलासा हुआ है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कोटा के चंद्रेसल मठ से जुड़े संत नंदनवन ने आरोपियों को हत्या के बाद पूरे घटनाक्रम को चोरी की वारदात का रूप देने की सलाह दी थी। आरोपियों से कथित तौर पर कहा गया था कि हत्या के बाद मठ की तिजोरी तोड़ दी जाए, अन्य सामान चोरी कर लिया जाए और मठ के बाहर खड़ी कार में आग लगा दी जाए, ताकि पुलिस को मामला लूट और चोरी से जुड़ा प्रतीत हो तथा जांच भटक जाए। हालांकि पुलिस अभी इन तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी है। इसी आधार पर जांच टीम अब दो अन्य संदिग्ध व्यक्तियों तक पहुंच गई है, जिनकी भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हत्या के मामले में फरार चल रहे दो आरोपियों, साजिश में शामिल एक महिला तथा एक विधि से संघर्षरत किशोर को पुलिस ने महाराष्ट्र के ढौंड रेलवे स्टेशन के पास से डिटेन कर गिरफ्तार किया। अब तक मामले में कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक किशोर को निरुद्ध किया गया है।
सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि 5 जून की रात चंद्रेसल मठ में सो रहे महंत देवानंद की चाकू से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी गई थी। मामले में पहले ही मुख्य साजिशकर्ता संतोष राय और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया जा चुका था। वारदात में शामिल अन्य आरोपी हत्या के बाद फरार हो गए थे, जिनकी तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। जांच में सामने आया कि मठ से जुड़े विवाद और व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते संतोष राय ने महंत को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी। उसने आदित्य वर्मा को एक लाख रुपए का लालच देकर हत्या के लिए तैयार किया। बाद में आदित्य ने अपने साथ अंकित बैरवा, पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस और एक नाबालिग को शामिल कर लिया।
आरोपियों ने हत्या से पहले मठ की रेकी की और महंत की दिनचर्या की पूरी जानकारी जुटाई 5 जून की रात चारों आरोपी दो बाइक से चंद्रेसल मठ पहुंचे। उन्होंने पहले मठ में रहने वाले एक अन्य संत के कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी ताकि कोई मदद के लिए न आ सके। इसके बाद सो रहे महंत देवानंद पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
सीआइ अनिल कुमार टेलर ने बताया फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की संयुक्त टीम ने लगातार तकनीकी निगरानी और साइबर इनपुट के आधार पर उनका पीछा किया। आरोपियों की लोकेशन उज्जैन, इंदौर, संभाजीनगर और अहिल्यानगर में ट्रेस हुई। करीब 2000 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद पुलिस ने महाराष्ट्र के ढौंड रेलवे स्टेशन के पास से उन्हें दबोच लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी महाराष्ट्र और गोवा भागकर लंबे समय तक फरारी काटने की तैयारी में थे। पुलिस ने आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा और आदित्य की पत्नी मीकल जॉर्ज को गिरफ्तार किया है।
जांच में महिला की भूमिका भी साजिश का हिस्सा होने के रूप में सामने आई है। उसे न्यायालय में पेश करने पर 26 जून तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और मामले में आगे भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
पूछताछ में मठ के चौकीदार की भूमिका संदिग्ध सामने आई है। उससे पूछताछ की जा रही है और जांच जारी है। मामले में अन्य कई नाम भी सामने आ सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जो भी व्यक्ति इस हत्याकांड में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
तेजस्वनी गौतम, एसपी कोटा सिटी