
Kota Shoe Showroom Fire: कोटा शहर के एरोड्रम सर्किल स्थित घोड़े वाले बाबा चौराहे के पास एक जूते के तीन मंजिला शोरूम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने इमारत की तीनों मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त ऊपरी मंजिल पर एक परिवार और कुछ किराएदार मौजूद थे, जिन्हें पास की इमारत की छत के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों और पास के दुकानदार राजबहादुर के अनुसार, आग की शुरुआत सबसे पहले बिल्डिंग की पहली मंजिल से हुई थी। कुछ ही मिनटों में लपटें बाहर निकलने लगीं और आग ने पूरी इमारत को घेर लिया। शोरूम के कर्मचारियों ने शुरुआत में फायर सिलेंडर की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन जूतों के सामान की वजह से लपटें तेजी से फैल गईं।
बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में रह रहे परिवार और किराएदार आग के कारण नीचे नहीं उतर सके और मदद के लिए चिल्लाने लगे। स्थिति को भांपते हुए आसपास के लोगों ने तत्परता दिखाई और उन्हें छत के रास्ते साथ वाली इमारत में पहुंचाकर सुरक्षित नीचे उतारा।
आसपास घना बाजार, निजी बैंक और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान होने के कारण इलाके में हड़कंप मच गया। पड़ोसी दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर सामान सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और गाड़ियों को वहां से हटाया। कोटा नगर निगम के फायर अनुभाग के उपायुक्त राकेश व्यास ने बताया कि आग की शुरुआत शोरूम की पहली मंजिल पर शॉर्ट सर्किट से हुई। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें पूरी इमारत में फैल गईं। आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के व्यापारियों में हड़कंप मच गया। बचाव के लिए कई दुकानदारों ने तुरंत अपनी दुकानों के शटर बंद कर दिए।
सूचना मिलने पर नगर निगम फायर ब्रिगेड की 12 दमकलें और थर्मल की 2 दमकलें मौके पर पहुंचीं और बिल्डिंग के बिजली के कनेक्शन काटने और आसपास की बिजली बंद करवाने के बाद आग बुझाने काम शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर 4 घंटे में काबू पाया जा सका। इस दौरान पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली और सीएडी सर्कल की ओर से आने वाले चौपहिया व बड़े वाहनों को गुमानपुरा की ओर डायवर्ट किया। दोपहिया वाहनों को एरोड्राम होकर निकाला गया।
इमारत की ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले परिवार और कुछ किराएदार आग और धुएं के कारण नीचे नहीं उतर सके। स्थिति गंभीर होती देख स्थानीय लोगों ने साहस का परिचय देते हुए उन्हें छत के रास्ते पास की इमारत तक पहुंचाया। इसके बाद सभी लोगों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। समय रहते किए गए इस रेस्क्यू के कारण बड़ा हादसा टल गया।