इंसान और वानर की दोस्ती बहुत पुरानी हैं। भगवान राम और भगवान हनुमान इस दोस्ती का एक अनुपम उदाहरण हैं। बदर की मौत पर उसका अंतिम संस्कार किया।
कोटा . इंसान और वानर की दोस्ती बहुत पुरानी हैं। भगवान राम और भगवान हनुमान इस दोस्ती का एक अनुपम उदाहरण हैं। लेकिन, वर्तमान समय में जहां लोग किसी की सहायता करने से खुद को दूर रखते हैं। ऐसे में अगर एक शहर में बदर की मौत होने पर लोगों ने न केवल उसका अंतिम संस्कार इंसानों की तरह किया बल्कि उसकी शव यात्रा भी निकाली।
यह जानकर हर कोई आश्चर्य करता हैं। ऐसा कोटा के किशोरपुरा क्षेत्र में हुआ। चंबल नदी के किनारे पर बसा इस क्षेत्र में कुछ दिनों पूर्व एक बंदर आया था जो कुछ ही दिनों में लोगों का चहेता बन गया। लेकिन अल सुबह बंदर का शव कचरे के ढेर में पड़ा मिला तो लोग दुखी हो गए और उन्होंने उसकी बॉडी वन विभाग को सौंपने के बजए विधि-विधान से वानर का अंतिम संस्कार किया।
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स्थानीय निवासी रवि कुमार ने बताया कि अलसुबह बंदर का शव यहां कचरे के ढेर के पास पड़ा मिला। इस पर उन्होंने ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण फाउंडेशन के पदाधिकारियों को इसकी सूचना दी। थोड़ी देर में ही फाउंडेशन के हरीश राठौर, तेजकरण अंची, त्रिलोक जैन, योगेश सोनी, शैलेंद्र मेहरा, हेमंत राव, राजा शर्मा सहित कई सदस्य मौके पर पहुंचे और वानर को कचरे से बाहर निकाल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की।
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इस बारे में स्थानीय निवासियों से पूछताछ करने पर लोगों ने बताया कि संभवत करंट से बंदर की मौत हुई है। इसके बाद फाउंडेशन सदस्य बंदर को लेकर किशोरपुरा मुक्तिधाम पहुंचे, यहां पर विधि विधान से उसका अंतिम संस्कार की प्रक्रिया विद्युत शवदाह गृह में की। बाद में अस्थियां चंबल नदी में विसर्जित की गई। शवदाह गृह के ऑपरेटर ओम प्रकाश ने बताया कि विद्युत शवदाह गृह की करीब ढाई करोड़ की मशीन से कोटा में पहली बार बंदर का अंतिम संस्कार किया गया है। इस मौके पर फाउंडेशन अध्यक्ष कमल सिंह यदुवंशी सहित कई सदस्य मौजूद थे।
बंदरों से आध्यात्मिक लगाव
फाउंडेशन के अध्यक्ष कमल सिंह ने बताया कि लोग वानरों को हनुमानजी का रूप मानते हैं और उनसे आध्यात्मिक जुड़़ाव महसूस करते हैं। इसलिए बंदर कभी-कभी कुछ लोगों को नुकसान भी पहुंचा दें तो वे उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति मानकर इग्नोर कर देते हैं।