कोटा

कोचिंग सिटी की हर दीवार कुछ कहती है, हॉस्टल से लेकर पीजी रूम तक दर-ओ-दीवार पर लिख रहे मन को छू लेने वाले स्लोगन

एक युद्ध अपने ही विरुद्ध…घिसोगे नहीं तो चमकोगे कैसे…गेम चेंजर है तू, तेरी बारी आएगी…आय एम अमेजिंग.. आय केन डु एनिथिंग.. यह कोटा के हॉस्टल्स और पीजी रूम की दर-ओ-दीवार पर अंकित वे मनोभाव हैं, जो बच्चों ने खुद लिखे हैं।

2 min read
May 27, 2024

आशीष जोशी
एक युद्ध अपने ही विरुद्ध…घिसोगे नहीं तो चमकोगे कैसे…गेम चेंजर है तू, तेरी बारी आएगी…आय एम अमेजिंग.. आय केन डु एनिथिंग.. यह कोटा के हॉस्टल्स और पीजी रूम की दर-ओ-दीवार पर अंकित वे मनोभाव हैं, जो बच्चों ने खुद लिखे हैं। वो भी बेड के पास। ताकि सुबह उठते ही उन्हें सेल्फ मोटिवेशन मिले।

मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए कोचिंग सिटी के रूप में देशभर में ख्याति अर्जित कर चुके कोटा की दीवारें बच्चों की ऐसी ही मन को छू लेने वाली भावनाओं से ओतप्रोत हैं। लाखों छात्र-छात्राएं यहां अकेले रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। कोचिंग के टीचर्स तो उन्हें मोटिवेट करते ही हैं, कभी उन्हें अकेलापन सालता है तो अपने कमरे में जहां जगह दिखे, वहां गीता के श्लोक से लेकर अंग्रेजी तक में मोटिवेशनल विचार लिख हल्के हो जाते हैं। कई विद्यार्थी ड्राइंग बनाकर भी अपने भाव व्यक्त कर रहे हैं। हालांकि मनोचिकित्सकों का मानना है कि बच्चों के कमरों की साइको-सोशल ऑडिट होनी चाहिए। ताकि उनके मन के भाव पढ़कर उन्हें सही दिशा दी जा सके।

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दीवार पर बच्चों के विचार

ये समय भी बीत जाएगा, फिर कल एक नया दौर आएगा…
तू रख हिम्मत-हौसला, तूने जो देखा है सपना वो सच होता जाएगा…
पॉजिटिविटी इज अ चॉइस.. आय सेलिब्रेट माय इंडिविजुअलिटी..
आय एम प्रिपेयर्ड टु सक्सीड…

मकान मालिक बोले-बच्चे दीवार खराब कर रहे…

इस बारे में अधिकतर मकान मालिकों ने कहा-बच्चे हैं..ऐसे ही दीवारें खराब करते रहते हैं। टोकने पर भी मानते नहीं। जबकि पेरेंट्स से पूछा तो उन्होंने हंस के टाल दिया। कोई इसे गंभीरता से नहीं ले रहा। जबकि बच्चों के मनोभावों को पढ़ने की जरूरत है।

हमें भी चाहिए कृष्ण


यह उम्मीदों के बोझ तले दबे बच्चों का डर है। युद्ध के दौरान अर्जुन के भय को तो श्रीकृष्ण ने दूर कर दिया, लेकिन इन बच्चों के डर को दूर करने के लिए भी किसी को कृष्ण बनना होगा। बच्चों का डर, घबराहट और बेचैनी ही दीवारों पर बयां हो रही है। इसे हल्के में न लेकर समझने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे बच्चों की तत्काल काउंसलिंग भी करनी चाहिए।
डॉ. जी.डी. कूलवाल, पूर्व विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, एसएन मेडिकल कॉलेज

अर्जुन-श्रीकृष्ण का संवाद करता प्रेरित

कोटा के एक पीजी रूम में बच्चे ने दीवार पर अर्जुन-श्रीकृष्ण का संवाद लिख रखा है। जिसमें अर्जुन कह रहे हैं- आपको डर नहीं लग रहा है? जवाब में श्रीकृष्ण कहते हैं-भविष्य में क्या होने वाला है, उसका किसी को पता नहीं। …और जो हुआ ही नहीं उसकी चिंता किसलिए। कर्म करो अर्जुन। जय-पराजय का विचार छोड़ दो। अपने कर्तव्य पर ध्यान दो। भय अपने आप दूर हो जाएगा। दूसरे कमरे में लिखा मिला-कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोस्त्वकर्मणि…।

Published on:
27 May 2024 11:06 am
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