Accused Arrested: परीक्षा में नकल कराने वाले संगठित गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है, जहां फर्जी सेंटर बनाकर अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए जा रहे थे और पर्चियों के जरिए नकल करवाई जा रही थी।
Fake Exam Center For MTS Group-C: राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन परीक्षाओं में नकल कराने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो इनामी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित था। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि 27 नवंबर को आरकेपुरम थाना क्षेत्र स्थित एक ऑनलाइन आइटी एजुकेशन सेंटर पर केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), आयुष मंत्रालय भारत सरकार की एमटीएस ग्रुप-सी ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को हल किए गए प्रश्नों की पर्चियां देकर नकल करवाई जा रही थी। इस संबंध में दर्ज रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि संबंधित परीक्षा केंद्र के पास संचालन के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। वहीं, परीक्षा आयोजित कराने वाली डेक्सआइटी ग्लोबल कंपनी की ओर से भी इस पते पर परीक्षा कराने के लिए कोई वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया था। इसके बावजूद मिलीभगत कर इस स्थान को परीक्षा केंद्र बनाया गया और अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी जारी किए गए थे।
इस मामले में फरार चल रहे दो मुख्य आरोपी गब्बर सिंह मीणा निवासी रिठोली, जिला करौली और बृजवासी मीणा निवासी बुढा मण्डारा, जिला करौली की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।
विशेष टीम ने जयपुर, करौली और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी और सूचना तंत्र सक्रिय रखा। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रिठोली गांव में घेराबंदी कर खेत में छिपे गब्बर सिंह मीणा को पकड़ लिया। वहीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बृजवासी मीणा को बारां जिले के भंवरगढ़ चौराहे से डिटेन किया गया। इस कार्रवाई में विशेष टीम के कांस्टेबल तंवर सिंह और साइबर सेल के कांस्टेबल सुनील चंदेल की अहम भूमिका रही।
कोटा के मकबरा थाना पुलिस ने गुरुवार को कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे एक भगोड़े स्थायी वारंटी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी वैभव गुरुप्रसाद नाइक को करीब 10 वर्षों बाद पुणे (महाराष्ट्र) से डिटेन किया गया।
एसएचओ लइक अहमद ने बताया कि आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद से ही वह फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार शहर बदलता रहा और अलग-अलग फैक्ट्रियों में मजदूर बनकर काम करता रहा।
यहां तक कि वह लंबे समय से अपने पैतृक निवास भी नहीं गया। पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश में लगातार निगरानी रखी और विभिन्न फैक्ट्रियों में मजदूर बनकर सूचनाएं जुटाईं। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर पुणे में दबिश दी गई, जहां से उसे पकड़ लिया गया।