Alstom Propulsion Vande Bharat: कोटा-नागदा रेलखंड में देश की पहली अत्याधुनिक अल्सटॉम वंदे भारत ट्रेन का परीक्षण किया जा रहा है। सोमवार को पहली बार पटरियों पर अल्स्टॉम प्रणोदन तकनीक पर आधारित ट्रेन का परीक्षण हुआ। इस रेक का निर्माण आरसीएफ कपूरथला में किया गया है।
कोटा। भारतीय रेल अब मेक इन इंडिया के साथ मॉडर्न ग्लोबल टेक्नोलॉजी के सफर पर है। दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर सोमवार को कोटा-नागदा-शामगढ़ रेलखंड में देश की पहली अल्सटॉम तकनीक आधारित 16 कुर्सीयान वाली वंदे भारत ट्रेन के रेक का परीक्षण शुरू हुआ। यह ट्रॉयल पूरे सप्ताह जारी रहेगा।
इसके माध्यम से स्वदेशी विनिर्माण और फ्रांसीसी तकनीक के गठबंधन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को छूने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। यह परीक्षण न केवल गति, बल्कि सुरक्षा और तकनीक के नए मानक स्थापित करने जा रहा है।
इसका निर्माण रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला में किया गया है। इसमें फ्रांस की अल्सटॉम कंपनी की भारतीय यूनिट अल्सटॉम ट्रांसपोर्ट इंडिया लिमिटेड ने अत्याधुनिक प्रणोदन प्रणाली (ट्रेन को गति देने वाली तकनीक) के साथ इसे बनाया है। यह परीक्षण अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन, लखनऊ के निदेशक (परीक्षण) धीरेन्द्र कुलश्रेष्ठ और वरिष्ठ अनुभाग अभियंता राघवेन्द्र सिंह की निगरानी में किया जा रहा है।
ट्रेन का प्रथम परीक्षण 60 से 115 किमी प्रति घंटे की गति तक में किया गया। इसमें यह देखा गया कि ट्रेन कितनी सहजता से गति पकड़ती है। इसके साथ ही ब्रेक कार्यक्षमता सत्यापन और अन्य तकनीकी प्रणालियां मिलकर सही काम कर रही हैं या नहीं, इसकी जांच भी की गई।
ट्रायल में मुख्य लोको निरीक्षक वाईके शर्मा, लोको पायलट विपिन कुमार सिंह, सह-लोको पायलट घनश्याम जोशी, मुख्य यातायात निरीक्षक सुशील कुमार जेठवानी तथा ट्रेन प्रबंधक रवि अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके साथ अल्सटॉम और वाबटेक (ब्रेकिंग एवं नियंत्रण प्रणाली निर्माता अंतरराष्ट्रीय कंपनी) की विशेषज्ञ तकनीकी टीम प्रणाली संचालन ट्रायल के दौरान कार्यरत है।
परीक्षण रेक (ट्रेन के डिब्बों का पूरा समूह) ने नागदा-कोटा खंड पर सभी स्थायी एवं अस्थायी गति प्रतिबंधों का पालन करते हुए ट्रायल पूरा किया। इसका अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक परीक्षण किया जाएगा। -सौरभ जैन, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, कोटा