राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 'गाय बनाम भैंस' के दूध पर जो तर्क दिए हैं, उसने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है। मंत्री जी ने पशु मनोविज्ञान और दूध की गुणवत्ता पर अपना 'अनोखा' ज्ञान साझा किया।
कोटा/रामगंजमंडी। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। रविवार को रामगंजमंडी के ग्राम खेड़ली (चेचट) में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से गाय और भैंस के बीच अंतर बताते हुए कुछ ऐसे उदाहरण दिए, जो अब चर्चा का विषय बन गए हैं। मंत्री ने वैज्ञानिक तर्कों के बजाय 'व्यवहारिक परीक्षण' का हवाला देते हुए बच्चों को केवल गाय का दूध पिलाने की सलाह दी।
मदन दिलावर ने मंच से एक काल्पनिक प्रयोग साझा किया। उन्होंने कहा, "पाँच-सात गायों और इतनी ही भैंसों को खड़ा करो जिन्होंने हाल ही में बच्चों को जन्म दिया हो। दोनों के बच्चों को एक साथ छोड़ दो। भैंस का बच्चा अपनी माँ को नहीं पहचान पाएगा, वह एक भैंस से दूसरी और दूसरी से तीसरी के नीचे जाएगा। बड़ी मुश्किल से उसे अपनी माँ मिलेगी। लेकिन गाय का बछड़ा सीधा अपनी माँ के पास जाकर दूध पीने लगेगा।"
मंत्री के अनुसार, यह साबित करता है कि गौमाता का दूध पीने वाला बच्चा जन्म से ही बुद्धिमान और विद्वान होता है, जबकि भैंस के बच्चे का माइंडसेट फिक्स (जड़) होता है।
दूध के असर पर बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि भैंस का दूध पीने के बाद बच्चा सुस्त हो जाता है और 'ऊंघने' (नींद में रहना) लगता है। वहीं, गाय का दूध पीने वाला बच्चा पूँछ ऊंची करके उछल-कूद करता है, यानी वह चंचल और सक्रिय रहता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि वे अपने बच्चों को प्रगतिशील और चंचल बनाना चाहते हैं, तो उन्हें गाय का ही दूध पिलाएं।
दिलावर ने अपने संबोधन में कहा, "गाय का बच्चा छोटा होता है तो बछड़ा, फिर केड़ा, फिर नारक्या और अंत में बैल बनता है। यानी उसमें क्रमिक विकास और प्रोग्रेस होती है। लेकिन भैंस का बच्चा छोटा हो तो पाड़ा, बड़ा हो तो पाड़ा और बुड्ढा हो जाए तो भी पाड़ा ही रहता है। वह पाड़ा का पाड़ा ही रहता है।" मंत्री के इस तर्क का सीधा इशारा यह था कि प्रोग्रेस केवल वही करता है जो गाय का दूध पीता है।
शिक्षा मंत्री के इस 'गजब ज्ञान' का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहाँ कुछ लोग इसे भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद के नजरिए से सही बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे 'अवैज्ञानिक' और 'हास्यास्पद' करार दे रहे हैं। विशेषकर 'भैंस पालकों' और डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों के बीच इस बयान को लेकर तीखी चर्चा है।