
कोटा . कोटा में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) में हुए 1000 करोड़ के निवेश के ज्यादातर करार एक साल बाद धरातल पर नहीं उतरे हैं। केवल फाइलों में ही निवेश दौड़ रहा। आयोजन पर सरकार ने करीब 19 करोड़ रुपए की मोटी रकम खर्च की थी और 28 हजार से अधिक लोगों को रोजगार देने का दावा किया था। लेकिन जमीनी स्तर पर दावे खोखले ही साबित हुए।
हुए थे 22 करार
'ग्राम' में कुल 22 एमओयू हुए थे, इनमें 1067 करोड़ का निवेश प्रस्तावित था। साथ ही 28 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने के दावे थे। एमओयू में 8 निजी मंडियों की स्थापना करने, 9 प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित करने, शेष कोल्ड चैन और डेयरी से संबंधित थे। शिव हैल्थ फू ड्स और राज्य सरकार के बीच 112 करोड़ रुपए का एमओयू हस्ताक्षरित हुआ था। इसके तहत कंपनी को रानपुर एग्रो फूड पार्क में सोया प्रोटीन आइसोलेट उत्पादन के लिए प्लांट लगाना था। यह अभी चालू नहीं हुआ है, यहां पानी की गंभीर समस्या है।
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कोटा में पिछले साल 24 से 26 मई तक 'ग्राम' का आयोजन हुआ था। किसानों और निवेशकों के बीच सीधा संवाद हुआ। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों से रूबरू करवाया गया। 'ग्राम' में कृषि आधारित उद्योगों के करार भी हुए। 'पत्रिका' ने ग्राम के दौरान हुए एमओयू की पड़ताल की तो पाया कि ज्यादातर अभी जमीन पर नहीं उतरे हैं। सिर्फ कसार में गोयल प्रोटीन की नई यूनिट चालू हुई है।
निवेशक बोले : जीएसटी, जमीन, जल की बाधाएं
निवेशकों से इस बारे बात की तो उनका कहना था कि जीएसटी और नोटबंदी के कारण निवेश का सारा गणित गड़बड़ा गया। इस अवधि में चालू उद्योगों पर ही जोर दिया, नए निवेश नहीं हो पाए। कुछ का कहना है कि कोटा के आसपास
कीमतें काफी ज्यादा होने से औद्योगिक निवेश के लिए जमीनें नहीं मिल पा रही। रानपुर के एग्रोबेस उद्योग में हुए निवेश पर पानी की समस्या के कारण कारखाना चालू नहीं हो पाया है।
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लहसुन प्रोसेसिंग इकाई भी चालू नहीं
मुम्बई के एक निवेशक ने लहसुन के बम्पर उत्पादन को देखते हुए करीब प्रोसेसिंग इकाई लगाने का 25 करोड़ का एमओयू किया था, लेकिन उपयुक्त जमीन नहीं मिलने के कारण यह धरातल पर नहीं उतरा। हालांकि दो-तीन जगह इसके लिए चिह्नित की गई हैं।
सपनों की हकीकत
हर्बल मंडी कोटा, बूंदी एवं उदयपुर में विभिन्न स्थानों पर निजी सब मार्केट यार्ड बनाया जाना था, लेकिन अभी तक नहीं बने। गोयल वेज ऑयल्स लि. लाडपुरा(कोटा)के कसार गांव में सरसों व सोयाबीन तेल की इकाई चालू हो गई।रामगंजमंडी में निजी मंडी यार्ड के लिए करार हुआ था, यह अभी फाइलों में ही है। बूंदी तथा बारां में चावल प्रोसेसिंग की इकाइयों के 100 करोड़ के करार हुए, ये भी अभी लम्बित हैं।