रेलवे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के बजाय तांबे के सोने-पॉलिश वाले सिक्के देने का मामला सामने आया है। एक कर्मचारी के शक पर जांच में सिक्कों में सिर्फ 0.25% चांदी पाई गई। दो साल से नकली सिक्के बांटने की आशंका पर विजिलेंस जांच शुरू हुई।
कोटा: चांदी के बेतहाशा बढ़ रहे भावों की मार रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर भी पड़ गई है। कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले चांदी के सिक्के की जगह तांबे के सिक्के बांट दिए गए। इन पर बकायदा सोने का पॉलिश चढ़ाया हुआ था।
एक कर्मचारी इसे बेचने गया तो सुनार ने इसे तांबे का सिक्का बताया। मामला सामने आने पर तीनों मंडलों में हंगामा मच गया है। रेलवे विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। कोटा रेल मंडल में साल 2025 में अब तक 326 रेल अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए। इसमें से 9 राजपत्रित, 251 ग्रुप सी और 66 ग्रुप डी के कर्मचारी शामिल हैं। सभी को एक-एक सिक्का दिया गया।
रेलवे के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को शक होने पर उसने रेलवे अधिकारियों को इसकी शिकायत की। इस पर जांच में पाया कि सिक्के में 0.25 फीसदी ही चांदी है। शेष 20 ग्राम के सिक्के में से 19.75 ग्राम से भी अधिक तांबा है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दो साल तक चांदी के नकली सिक्के बांटे जाते रहे। यह बड़ा गंभीर मामला है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे पूरे पश्चिम मध्य रेलवे जोन के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान को धक्का लगा है।
-एमएस फारूखी, संगठन सचिव, पेंशनर एसोसिएशन ऑफ वेस्ट सेंट्रल रेलवे
चांदी के नकली सिक्के बांटने का मामला गंभीर है। कोटा रेल मंडल के दो वर्ष में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के चांदी के सिक्कों की जांच करवाकर, जिनके सिक्के नकली हैं, उन्हें नियमानुसार चांदी के सिक्के दिए जाने चाहिए।
-अब्दुल खालिक, सचिव, वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ, कोटा
पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल में नकली चांदी के सिक्के बांटने का मामला प्रकाश में आया है। कोटा में फिलहाल किसी रेलवे कर्मचारी ने रेल प्रशासन को ऐसी शिकायत नहीं दी है।
-सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम, कोटा रेल मंडल