कोटा

Success Story: मां ने छोड़ी डॉक्टर की सरकारी नौकरी, जुडवां बेटों ने JEE Main में रचा इतिहास; एक साथ की तैयारी फिर एक जैसे आए स्कोर

ओडिशा के जुड़वां भाइयों ने JEE Main 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक जैसा स्कोर हासिल कर इतिहास रच दिया। दोनों ने कोटा में साथ रहकर तैयारी की और एक ही परीक्षा में बराबर अंक प्राप्त किए।

2 min read
Feb 17, 2026
अपनी मां के साथ दोनों बेटे (फोटो: पत्रिका)

Twins Brother Crack JEE-Main 2026 Together: कॅरियर सिटी कोटा में सफलता की अनूठी कहानी निकलकर आई है। इस बार कहानी जुड़वा सफलता की है। एक साथ पैदा हुए दो भाइयों ने जेईई-मेन एक साथ क्रेक की है और एक ही स्कोर से क्रेक की है। एक ही शिफ्ट में परीक्षा देने वाले दोनों भाइयों ने एक जैसा 300 में से 285 स्कोर किया है।

ओडिशा के भुवनेश्वर से ये परिवार कोटा में कॅरियर बनाने आया। एलन में आईआईटी-जेईई की तैयारी के लिए प्रवेश लिया। मां ने भी बच्चों के लिए अपना कॅरियर दांव पर लगाया और कोटा तीन साल से बच्चों के साथ कोटा रह रही हैं।

ये भी पढ़ें

JEE Main 2026: जेईई मेन में राजस्थान फिर नंबर वन, 3 के 100 परसेंटाइल, पढ़िए कबीर छिल्लर की Success Story

सफलता की यह कहानी जुड़वां भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान की है। एक साथ पैदा हुए, एक साथ स्कूलिंग, एक साथ कोटा आए, एक साथ एक क्लास में पढ़े, इसके बाद एक साथ, एक सेंटर पर एक ही शिफ्ट में जेईई-मेन का एग्जाम दिया और अब एक ही स्कोर से परीक्षा उत्तीर्ण की।

डॉक्टर मां ने सरकारी नौकरी छोड़ी

महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान की इस कामयाबी के पीछे जो सबसे मजबूत स्तंभ दोनों की मां डॉ.जीनत बेगम है। डॉ. जीनत बेगम गाइनोलॉजिस्ट हैं और ओडिशा में सरकारी सेवा में कार्यरत थीं। जब दोनों बेटों ने इंजीनियरिंग में कॅरियर बनाने की ठानी। कोटा आकर जेईई की तैयारी करने आए, तो उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और उनकी देखभाल को प्राथमिकता देते हुए अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। वे पिछले तीन वर्षों से वे कोटा में रहकर दोनों बेटों की दिनचर्या, पढ़ाई और सेहत का पूरा ध्यान रख रही हैं।

दोनों का एक-दूसरे से मुकाबला

7 मई 2008 को जन्मे ये दोनों भाईयों ने एक ही स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद दोनों ने साथ में जेईई एडवांस्ड क्रेक करने का सपना देखा और उसे साकार करने के लिए कोटा आए। यहां एलन में एडमिशन लिया। यहां भी एक ही क्लास में साथ बैठते थे। स्टडी स्ट्रेटेजी एवं टाइमटेबल भी एक जैसा रहता था। सबसे बड़ी बात है कि इन दोनों का मुकबला अन्य स्टूडेंट्स से नहीं होकर एक-दूसरे से होता था। दोनों साथ पढ़ते है, साथ खेलते हैं और हर टेस्ट में एक-दूसरे से बेहतर करने की कोशिश करते हैं। यही आपसी प्रतिस्पर्द्धा इनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई। टेस्ट एक के नंबर कम आते तो वो दूसरे को मोटिवेट करता और यह भी बताता कि किस वजह से नंबर कम आए। ताकि अगले टेस्ट में उस टॉपिक की मजबूती से तैयारी कर सके।

30 से ज्यादा गोल्ड मैडल

दोनों भाई शुरुआत से पढ़ाई में होशियार हैं। महरूफ ने 10वीं कक्षा में 95.2 प्रतिशत जबकि मसरूर ने 97.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। इनकी सफलता सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड्स में भी दोनों भाई करीब 30 गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। महरूफ और मसरूर का कहना है कि एलन में उन्हें पढ़ाई के लिए अनुशासित माहौल, अनुभवी फैकल्टी और बेस्ट पीयर ग्रुप का अवसर मिला, जिससे वे अपनी तैयारी को लगातार बेहतर कर पाए। दोनों आगे चलकर आईआईटी मुंबई की सीएस ब्रांच से बीटेक करना चाहते हैं।

ये भी पढ़ें

राजस्थान का यह हाईवे 818.46 करोड़ की लागत से होगा फोरलेन, 18 को टेंडर; 9 नई पुलिया और 2 अंडरपास बनेंगे

Updated on:
17 Feb 2026 08:35 am
Published on:
17 Feb 2026 08:33 am
Also Read
View All

अगली खबर