
भर्ती प्रसूताओं की फाइल फोटो: पत्रिका
Drug Control Organization Action: मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सप्लाई मामले में आखिरकार इंजेक्शन सप्लायर्स कंपनी पर गाज गिर गई। औषधि नियंत्रण संगठन ने इंजेक्शन सप्लाई करने वाली मेडिकल फर्म मैसर्स राजस्थान मेडिकल हॉल का औषधि अनुज्ञापन (ड्रग लाइसेंस) निरस्त कर दिया। गौरतलब है कि कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में 3 मई को 12 प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद अचानक तबीयत खराब हो गई थी। इसमें से पांच की मौत हुई थी, जबकि सात प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। उसके बाद औषधि नियंत्रक संगठन ने अस्पताल से दवा के सैंपल लिए थे।
इलाज में उपयोग लिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जांच में गंभीर अनियमितता सामने आई थी। दवा जांच में पाया गया कि संबंधित इंजेक्शन में निर्धारित सक्रिय तत्व ऑक्सीटोसिन मौजूद नहीं था। जांच रिपोर्ट आने के बावजूद लंबे समय तक संबंधित ठेका फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
राजस्थान पत्रिका ने 23 जून को ‘इंजेक्शन सप्लायर पर कार्रवाई कागजों में दफन, डेढ़ माह से फाइल घुमा रहे’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि डेढ़ माह बाद दवा सप्लायर्स पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद औषधि नियंत्रक संगठन हरकत में आया और इन्द्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया स्थित मैसर्स राजस्थान मेडिकल हॉल पर कड़ा एक्शन लिया है। इस फर्म के मालिक महेश मित्तल हैं।
सहायक औषधि नियंत्रक अधिकारी देवेन्द्र गर्ग ने बताया कि औषधि नियंत्रण अधिकारियों के निरीक्षण में फर्म के संचालन में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि निरीक्षण पुस्तिका संधारित नहीं की जा रही थी। निरीक्षण के दौरान फर्म पर कार्यरत योग्य व्यक्ति शादाब खान गैरमौजूद मिला। उसकी गैरमौजूदगी में फर्म मालिक महेश मित्तल द्वारा समस्त प्रकार की औषधियों का विक्रय किया जाना पाया गया। इस पर उनका जवाब भी संतोषजनक नहीं पाया गया।
अब मेडिकल कॉलेज स्तर पर कार्रवाई का इंतजार
अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन स्तर पर भी फर्म के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार है। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सैम्पल फेल मिलने के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संबंधित फर्म के सप्लायर्स पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। कॉलेज प्रशासन ने सिर्फ फर्म सप्लायर्स के बयान लेकर इतिश्री कर दी जबकि नए अस्पताल प्रशासन ने कॉलेज प्रशासन को फर्म के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए लिखा है। उसके बाद कॉलेज प्रशासन ने फर्म को ब्लैक लिस्ट व आर्थिक दंड की कार्रवाई के लिए लेखा विभाग को फाइल भिजवाई है, लेकिन उसके बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
Updated on:
25 Jun 2026 09:10 am
Published on:
25 Jun 2026 09:09 am
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