
झाला हाउस और गोले में निगम प्रशासन की ओर से बेरिकेट्स लगाकर झाला हाउस को तोड़ने की कार्रवाई करते हुए की फोटो: पत्रिका
Demand To Save Kota Jhala House: कोटा शहर की ऐतिहासिक और हेरिटेज इमारत झाला हाउस को बचाने की मांग अब जनआंदोलन का स्वरूप लेने लगी है। नगर निगम प्रशासन की ओर से भवन के जर्जर हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू होने के बाद विरासत संरक्षण से जुड़े नागरिक, इतिहासकार और विभिन्न सांस्कृतिक संगठन इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग को लेकर एकजुट हो गए हैं। विरासत प्रेमियों का कहना है कि झाला हाउस कोटा की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण रियासतकालीन इमारतों में से एक है, जिसे धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यह भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
झाला हाउस के ऐतिहासिक महत्व और इसके संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार सुबह 7.30 बजे से सूरजपोल गेट से विशेष हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। इस दौरान प्रतिभागियों को भवन का इतिहास, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक महत्व, वर्तमान स्थिति और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी।
हम लोग संस्था के संयोजक डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि हेरिटेज वॉक के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं और नागरिकों को शहर की इस धरोहर से जोड़ने का प्रयास गया है। आयोजन में हाड़ौती हेरिटेज वॉक्स, हम लोग, इंटैक कोटा हेरिटेज सोसाइटी, कला भ्रमण सहित कई विरासत एवं सांस्कृतिक संगठन ने भागीदारी निभाई।
विरासत संरक्षण से जुड़े नागरिकों और संगठनों ने प्रशासन की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश और दुनिया के कई शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कर उन्हें नई उपयोगिता दे रहे हैं, ऐसे समय में कोटा की महत्वपूर्ण विरासत इमारत को ध्वस्त करना चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि भवन का वह हिस्सा, जहां अभिलेखागार संचालित हो रहे हैं, आज भी अच्छी स्थिति में है। नियमित संरक्षण और रखरखाव के कारण यह हिस्सा सुरक्षित बना हुआ है। यह उदाहरण दर्शाता है कि तकनीकी संरक्षण और समय-समय पर मरम्मत के जरिए पूरे भवन को भी संरक्षित किया जा सकता है।
हम लोग संस्था के डॉ. सुधीर गुप्ता, हाड़ौती हेरिटेज वॉक्स के सर्वेश सिंह हाड़ा, कोटा हेरिटेज सोसाइटी की ज्योति सक्सेना और जूही शर्मा, इंटैक के निखिलेश सेठी तथा हाड़ौती टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के रवीन्द्र सिंह तोमर ने संयुक्त रूप से कहा कि किसी भी विरासत भवन के लिए ध्वस्तीकरण अंतिम विकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संरक्षण, पुनर्स्थापन और पुनः उपयोग की संभावनाओं पर पहले गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि शहर की ऐतिहासिक इमारतें एक-एक कर समाप्त होती रहीं तो कोटा अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक पहचान खो देगा। उन्होंने विशेषज्ञों, संरक्षण वास्तुकारों और इतिहासकारों की सलाह से भवन के संरक्षण और पुनर्स्थापना की संभावनाओं का अध्ययन कराने तथा ध्वस्तीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
विशेषज्ञों ने झाला हाउस के विभिन्न कोणों से लिए गए दर्जनों फोटोग्राफ को AI तकनीक की मदद से एकीकृत कर भवन का त्रि-आयामी (3-डी) दृश्यांकन तैयार किया है। इस विजुअल में पूरा भवन अपने पारंपरिक हेरिटेज स्वरूप में बेहद आकर्षक दिखाई देता है। विरासत संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इसी आधार पर भवन का जीर्णोद्धार किया जाए तो झाला हाउस कोटा के प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों में शामिल हो सकता है।
Updated on:
25 Jun 2026 02:33 pm
Published on:
25 Jun 2026 07:22 am
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