कोटा

3 साल से स्वच्छत्ता रैंकिंग में फिसड्डी कोटा, अव्वल आने के लिए निगम ठिकाने लगा रहा अपनी नाकामी

कोटा शहर में नगर निगम प्रशासन शहर को स्वच्छ बनाने में कैसे हुआ फैल? जबकि आनन-फानन में घर-घर कचरा संग्रहण भी शुरू कर दिया।

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Dec 30, 2017
Chawani Ramchandrapura, Railway Puliya Kota

केन्द्र जनवरी में चार हजार से अधिक शहरों का स्वच्छता सर्वेक्षण कर रैंकिंग देगा। ऐसे में कोटा नगर निगम प्रशासन शहर को स्वच्छ बनाने के बजाए गंदगी पर पर्दा डालने में जुटा है। कचरा उठाने में नाकाम साबित हो रहा निगम अब जेसीबी मशीन लगाकर कचरे के ढेर को तालाब में फैला रहा है।
तीन साल से फिसड्डी कोटा की रैंक सुधारने के लिए नगर निगम आधी-अधूरी तैयारियों से जुटा है। निगम ने आनन-फानन में घर-घर कचरा संग्रहण तो शुरू कर दिया लेकिन घरों से एकत्र कचरा सड़कों पर डाला जा रहा है। बदहाली के हल्ले के बीच निगम अधिकारियों की शह पर ठेकेदारों ने इस कचरे को ठिकाने लगाने का नया तरीका भी निकाल लिया। छावनी-रामचन्द्रपुरा में रेलवे पुलिया के पास रियासतकालीन तालाब में निगम के टिपर कचरा खाली कर रहे हैं।

भूखंडों पर भी खाली होते टिपर
सड़क और तालाब ही नहीं, घरों से एकत्र कचरा खाली भूखण्डों तक में डाला जा रहा है। प्रशासन खाली भूखंडों को लेकर मालिकों को सफाई का नोटिस दे रहा लेकिन निगम के ठेकेदार शायद इससे कोई इत्तेफाक नहीं रखते। निगम में प्रतिपक्ष नेता अनिल सुवालका ने शुक्रवार को लैण्डमार्क सिटी के आसपास कचरा एकत्र कर टिपरों को सड़क के किनारे कचरा डालते हुए पकड़ा। सुवालका ने बताया कि टिपर खाली प्लाटों पर भी टिपर कचरे को खाली कर रहे हैं, जिससे भविष्य में बीमारियां व महामारी फैलने का डर लोगों में व्याप्त हो गया है।


नाराजगी, तारबंदी और गंदगी
पिछले साल डीसीएम रोडवेज बस टर्मिनल से बारां रोड के बीच अस्सी फीट रोड पर कचरा पड़ा रहने पर राज्य सरकार ने महापौर, तत्कालीन आयुक्त व कलक्टर से कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद नगर विकास न्यास से तत्काल कचरा डालने की जगह फेसिंग करवा दी थी, लेकिन निगम के ठेकेदारों से इसी रोड पर अब आगे कचरा डालना शुरू कर दिया है। निगम प्रशासन आंखें मूंद बैठा है।

सुबह 11 बजे
छावनी-रामचन्द्रपुरा में रेलवे पुलिया के पास तालाब के किनारे सैकड़ों टन मलबे का ढेर लगा हुआ था। यहां शुक्रवार सुबह 11 बजे एक जेसीबी मशीन पहुंची। जेसीबी मशीन ने कचरे के ढेर को तालाब के पानी में धकेलना शुरू किया। 'पत्रिका टीमÓ पहुंची तो जेबीसी चालक हड़बड़ा गया और जेसीबी मशीन खड़ी कर दी। थोड़ी देर बात फोन पर बात करने लगा। फोन पर बात से 'रिलेक्सÓ होने पर करीब पांच मिनट बाद फिर पानी में कचरा फैलाने का काम ? शुरू कर दिया गया।

Updated on:
30 Dec 2017 06:01 pm
Published on:
30 Dec 2017 05:44 pm
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