कहीं दुर्गम राहों और लम्बी गुफाओं से गुजरकर भक्तों ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए तो कहीं शिव को नृसिंह रूप में दिखाया गया।
कहीं दुर्गम राहों और लम्बी गुफाओं से गुजरकर भक्तों ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए तो कहीं शिव को नृसिंह रूप में दिखाया गया। सावन के दूसरे सोमवार को कुछ इसी तरह से शिवालयांें व अन्य मंदिरों में छटा बिखरी।
रामतलाई स्थित जगत माता मंदिर में 350 से अधिक बर्फ की सिल्लियों से भगवान भोलेनाथ की बाबा अमरनाथ स्वरूप में झांकी सजाई गई। करीब 60 फीट लंबी गुफा से गुजरकर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन हुए। गुफा को प्राकृतिक स्वरूप देने के लिए उबड़-खाबड़ तो कहीं समतल बनाया गया। गजमुख में प्रवेश कर लोग गुफा में पहुंचे।
भगवान अमरनाथ के दर्शन खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। ढोल नगाड़ों के साथ रात को बर्फानी बाबा की आरती की गई। नीलकंठ स्थित महादेव मंदिर में शिव को प्रिय भंग से सजाया गया। इसमें नृसिंग रूप के दर्शन हुए। तलवंडी स्थित राधाकृष्ण मंदिर में भी भगवान शिव के नृसिंग रूप में दर्शन कराए गए।
थेगड़ा स्थित शिवपुरी धाम पर सुबह से ही भक्तजनों की भीड़ उमड़ी। लोगों ने एक-एक कर 525 शिवलिंगों का अभिषेक किया। यहां धाम पर स्थापित सहस्त्रशिवलिंग पर 12 हजार 12 बिल्वपत्रों की माला से विशेष शृंगार किया गया। श्रद्धालुओं की भीड़ से पुलिया पर जाम लग गया।
पुलिस ने जाम खुलवाया। कंसुआ स्थित कर्णेश्वर महादेव का भांग व पंचमेवे से शृंगार किया। अन्य मंदिरों में भी पूजा अर्चना व अभिषेक का दौर चला। इधर महावीर नगर तृतीय स्थित ओमकारेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव व पार्वती के विवाह का आयोजन किया गया। महिलाओं ने शिव पार्वती के रूप में सज धजकर नृत्य किया। समापन पर आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।