लखीमपुर खेरी

Navratri 2018: लक्ष्मीपूजा के कारण ही बदल गया था इस शहर का नाम, सुबह से मंदिरों में उमड़ने लगे श्रद्धालु

माता लक्ष्मी के नाम पर ही पड़ा था लखीमपुर का नाम, जानें इतिहास...
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Sankata devi temple lakhimpur

लखीमपुर-खीरी. चैत्र नवरात्र आज से यानी 18 मार्च से शुरू हो गये हैं। 25 मार्च को ही अष्टमी और नवमी है। नवरात्र का व्रत 26 मार्च को तोड़ा जाएगा। कलश स्थापना के बाद ही पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। संकटा देवी मंदिर के आचार्य प्रमोद दीक्षित ने बताया कि रविवार को कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 5:15 बजे से पूर्वाहन 11:55 तक रहेगा। इसके बाद भी अगर कोई कोई रह जाता है तो वह 11:30 से 12:30 बजे के बीच कलश स्थापना कर सकता है। शहर के प्रसिद्ध संकटा देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। संकटा देवी का स्थान करीब 300 साल पुराना है और माता के नाम पर ही नगर का नाम लक्ष्मीपुर पड़ा था, जो अब लखीमुपर के नाम से जाना जाता है।

लखीमपुर में स्थित करीब 300 साल पुराना संकटा देवी का मंदिर कभी एक मठिया के रूप में था। तत्कालीन स्टेट महेवा के राजाओं ने इस मंदिर को भव्य रूप दिया है। इस मंदिर में लक्ष्मी माता की मूर्ति स्थापित है, जिसकी संकटा देवी के रूप में मान्यता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद पांडे के अनुसार, इस मंदिर की मान्यता जिले में दूर-दूर तक फैली है। लखीमपुर के लिए तो यह कुल देवी हैं। माता लक्ष्मी के पूजन के कारण नगर का नाम भी लक्ष्मीपुर पड़ा था, जो वर्तमान में लखीमपुर हो गया।

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नवरात्र पर लगता है भक्तों का तांता
नवरात्र में भक्तों द्वारा बड़ी ही श्रद्धा के साथ मां संकटा देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र भर मंदिर परिसर में देवी भागवत व अन्य पूजा अनुष्ठान भी किए जाते हैं। शहरवासी विवाह मुंडन संस्कार आदि मांगलिक पर्व पर यह दर्शन करने अवश्य आते हैं। नवरात्र के समय पंडाल तैयार किया जाता है और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा बनाई जाती है। पूरे मंदिर को खास तरीके से सजाया जाता है। नवरात्र के अलावा अन्य दिनों में भी देवी भक्ति मंदिर में पूजा पाठ साधना इत्यादि करते हैं। अन्य दिनों में भी मंदिर में चार बार आरती की जाती है।

पुलिस चौकन्नी, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
नवरात्रि के चलते पुलिस प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गये हैं। मंदिर परिसर और मंदिर के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहता है। मंदिर के बाहर बैरी-केटिंग की भी व्यस्था की जाती है, ताकि माता के दर्शन करने आने वाले भक्तों को किसी भी प्रकार की समस्या न उत्पन्न हो। यही नहीं आवश्यकता पड़ने पर पुलिस द्वारा ड्रोन कैमरे से भी मंदिर की सुरक्षा पर नजर रखी जाती है।

ऐसे पहुंचें माता के मंदिर
शहर के रोडवेज बस स्टैंड से उतरकर रिक्शा टेंपो के द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। रोडवेज बस स्टैंड से मंदिर की दूरी आधा किलोमीटर के आसपास है। वही रेलवे स्टेशन के करीब यह मंदिर स्थापित है।

Updated on:
18 Mar 2018 10:48 am
Published on:
18 Mar 2018 10:31 am
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